Maha Lakshmi Chalisa, Maha Lakshmi Chalisa ( With Substitles ) By Anup Jalota
Maha Lakshmi Chalisa, Maha Lakshmi Chalisa ( With Substitles ) By Anup Jalota

Maha Lakshmi Chalisa ( With Substitles ) By Anup Jalota

दोहा
जय जय श्री महालक्ष्मी करुँ मात तव ध्यान ।
सिद्ध काज मम कीजिए निज शिशु सेवक जान ॥ १ ॥
चौपाई
नमो महा लक्ष्मी जय माता, तेरो नाम जगत विख्याता ।
आदि शक्ति हो मात भवानी, पूजत सब नर मुनि ज्ञानी ॥ १ ॥
जगत पालिनी सब सुख करनी, निज जनहित भण्डारन भरनी ।
श्वेत कमल दल पर तव आसन, मात सुशोभित है पदमासन ॥ २ ॥
श्वेताम्बर अरु श्वेता भूषन, श्वेतहि श्वेत सुसज्जित पुष्पन ।
शीश छत्र अति रुप विशाला, गल सौहे मुक्तनकी माला ॥ ३ ॥
सुन्दर सोहे कुंचित केशा, विमल नयन अरु अनुपम भेषा ।
कमलनाल समभुज तवचारी, सुरनर मुनिजनहित सुखकारी ॥ ४ ॥
अद्भुत छटा मात तवबानी, सकलविश्व कीन्हो सुखखानी ।
शांतिस्वभाव मृदुलतव भवानी, सकल विश्र्वकी होसुखखानी ॥ ५ ॥
महालक्ष्मी धन्य हो माई, पंच तत्व में सृष्टि रचाई ॥
जीव चराचर तुम उपजाए, पशु पक्षी नर नारि बनाए ॥ ६ ॥
क्षितितल अगणित वृक्षजमाए, अमितरंग फल फूल सुहाए ।
छवि बिलोक सुरमुनि नरनारी, करे सदा तव जय जय कारी ॥ ७ ॥
सुरपति औ नरपत सब ध्यावैं, तेरे सम्मुख शीश नवावैं ।
चारहु वेदन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया ॥ ८ ॥
जापर करहु मातु तुम दाया, सोई जग में धन्य कहाया ।
पल में राजहि रंक बनाओ, रंक राव कर बिलम न लाओ ॥ ९ ॥
जिन घरकरहु माततुम बासा, उनका यश हो विश्र्व प्रकाशा ।
जो ध्यावै सो बहु सुख पावै, विमुख रहै हो दुख उठावै ॥ १० ॥
महालक्ष्मी जन सुख दाई, ध्याऊं तुमको शीश नवाई ।
निजजन जानिमोहिं अपनाओ, सुखसम्पति दे दुख नसाओ ॥ ११ ॥
ओंम श्री श्री जयसुखकी खानी, रिद्धिसिद्ध देउ मातजनजानी ।
ओंमहृीं हृीं सब ब्याधिहटाओ, जनउन बिमल दृष्टिदर्शाओ ॥ १२ ॥
ओंम क्लीं क्लीं शत्रुन क्षयकीजै, जनहित मात अभय वरदीजै ।
ओंम जयजयति जयजननी, सकलकाज भक्तन के सरनी ॥ १३ ॥
ओंम नमो नमो भवनिधि तारनी, तरणि भंवर से पार उतारनी ।
सुनहु मात यह विनयहमारी, पुरवहु आशन करहु अबारी ॥ १४ ॥
रिणी दुखी जो तुमको ध्यावै, सो प्राणी सुख सम्पति पावै ।
रोग ग्रसित जो ध्यावै कोई, ताकी निर्मल काया होई ॥ १५ ॥
विष्णु प्रिया जय जय महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी ।
पुत्रहीन जो ध्यान लगावै, पाए सुत अतिहि हुलसावै ॥ १६ ॥
त्राहि त्राहि शरणागत तेरी, करहु मात अब नेक न देरी ।
आवहु मात विलम्बन कीजै, हृदय निवासभक्त बर दीजै ॥ १७ ॥
जानू जप तप का नहिं भेवा, पार करौ भवनिध बिन खेवा ।
बिनवों बार-बार कर जोरी, पूरण आशा करहु अब मेरी ॥ १८ ॥
जानि दास मम संकट टारौ, सकल व्याधि से मोहिं उबारौ ।
जो तव सुरति रहै लव लाई, सो जग पावै सुयश बडाई ॥ १९ ॥
छायो यश तेरा संसारा, पावत शेष शम्भु नहिं पारा ।
गोविंदनिशदिनशरणतिहारी, करहुपूरण अभिलाष हमारी ॥ २० ॥
दोहा
महालक्ष्मी की कथा पढै सुनै चित लाय ।
ताहि पदारथ मिलै अब कहै वेद अस गाय ॥ २ ॥
॥ इति महालक्ष्मी चालीसा संपूर्ण ॥

See also  Laxmi Beej Mantra Maa Lakshmi Anuradha Paudwal Devotional

Recent Posts

कथा ये है महाराज मेरे की – Lyrics & Meaning

कथा ये है महाराज मेरे की छत्रपति संभाजी महाराज – A Prayer to Chhatrapati Sambhaji Maharaj Origin & Spiritual Essence Why This Bhajan Resonates Devotees chant this when their spirit feels tested—its powerful refrain “महाराज मेरे” is a soul’s…

Mere Satguru Ne Di Thi Davai Lyrics in Hindi & Meaning

Mere Satguru Ne Di Thi Davai: Invoking the Guru’s Liberating Wisdom This soul-stirring bhajan venerates the Satguru (True Spiritual Master) as the divine physician who dispenses the only remedy for life’s deepest sufferings. Composed by Sant Karmaveer Tufani, it…

Janm Diyo Thari Maa Dukh Dekhiyo Lyrics in Hindi & Meaning

जन्म दियो थारी माँ दुख देखियो (Maa’s Grief Upon Birthing You) This soul-stirring Chetavani Bhajan (admonitory hymn) is addressed to the Divine Mother (Maa) – a call for repentance when children forget their filial duties in the dark age…