Shri Harsu Brahm Chalisa

बाबा हरसू ब्रह्‌म के चरणों का करि ध्यान। चालीसा प्रस्तुत करूं पावन यश गुण गान॥   हरसू ब्रह्‌म रूप अवतारी। जेहि पूजत नित नर अरु नारी॥१॥   शिव अनवद्य अनामय रूपा। जन मंगल हित शिला स्वरूपा॥ २॥   विश्व कष्ट

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Shri Ganga Chalisa

दोहा जय जय जय जग पावनी जयति देवसरि गंग। जय शिव जटा निवासिनी अनुपम तुंग तरंग॥ चौपाई जय जग जननि अघ खानी, आनन्द करनि गंग महरानी। जय भागीरथि सुरसरि माता, कलिमल मूल दलनि विखयाता। जय जय जय हनु सुता अघ

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Shri Vishnu Chalisa

दोहा विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय। कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय॥ चौपाई नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी। प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥ सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत।

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Shri Navagraha Chalisa

श्री नवग्रह चालीसा श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित सिरनाय। नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय।। जय जय रवि शशि सोम बुध जय गुरु भृगु शनि राज। जयति राहु अरु केतु ग्रह करहुं अनुग्रह आज।। चौपाई श्री सूर्य स्तुति प्रथमहि

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Shri Ravi Das Chalisa

दोहा बन्दौ वीणा पाणि को, देहु आय मोहिं ज्ञान। पाय बुद्धि रविदास को, करौं चरित्र बखान। मातु की महिमा अमित है, लिखि न सकत है दास। ताते आयों शरण में, पुरवहुं जन की आस। चौपाई जै होवै रविदास तुम्हारी, कृपा

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Shri Surya Chalisa

दोहा कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अंग। पद्मासन स्थित ध्याइये, शंख चक्र के संग।। चौपाई जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर। भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर। विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन। अम्बरमणि, खग,

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Shri Sai Chalisa (Sai Baba Chalisa)

पहले साईं के चरणों में, अपना शीश नवाऊँ मैं। कैसे शिर्डी साईं आए सारा हाल सुनाऊँ मैं। कौन हैं माता, पिता कौन हैं, यह न किसी ने भी जाना। कहाँ जनम साईं ने धारा, प्रश्न पहेली सा रहा बना। कोई

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Shri Pitar Chalisa (Pittar Chalisa)

दोहा हे पितरेश्वर आपको दे दियो आशीर्वाद, चरणाशीश नवा दियो रखदो सिर पर हाथ। सबसे पहले गणपत पाछे घर का देव मनावा जी। हे पितरेश्वर दया राखियो, करियो मन की चाया जी।। चौपाई पितरेश्वर करो मार्ग उजागर, चरण रज की

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Shri Giriraj Chalisa ||

दोहा बन्दहुँ वीणा वादिनी, धरि गणपति को ध्यान। महाशक्ति राधा, सहित कृष्ण करौ कल्याण। सुमिरन करि सब देवगण, गुरु पितु बारम्बार। बरनौ श्रीगिरिराज यश, निज मति के अनुसार। चौपाई जय हो जय बंदित गिरिराजा, ब्रज मण्डल के श्री महाराजा। विष्णु

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Shri Parashuram Chalisa

दोहा श्री गुरु चरण सरोज छवि, निज मन मन्दिर धारि। सुमरि गजानन शारदा, गहि आशिष त्रिपुरारि।। बुद्धिहीन जन जानिये, अवगुणों का भण्डार। बरणौं परशुराम सुयश, निज मति के अनुसार।। चौपाई जय प्रभु परशुराम सुख सागर, जय मुनीश गुण ज्ञान दिवाकर।

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