ममैवांशो जीवलोके जीवभूत: सनातन: |
मन:षष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति || 7||/h2>

mamaivānśho jīva-loke jīva-bhūtaḥ sanātanaḥ
manaḥ-ṣhaṣhṭhānīndriyāṇi prakṛiti-sthāni karṣhati

Audio

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भावार्थ:

इस देह में यह जीवात्मा मेरा ही सनातन अंश है (जैसे विभागरहित स्थित हुआ भी महाकाश घटों में पृथक-पृथक की भाँति प्रतीत होता है, वैसे ही सब भूतों में एकीरूप से स्थित हुआ भी परमात्मा पृथक-पृथक की भाँति प्रतीत होता है, इसी से देह में स्थित जीवात्मा को भगवान ने अपना ‘सनातन अंश’ कहा है) और वही इन प्रकृति में स्थित मन और पाँचों इन्द्रियों को आकर्षित करता है॥7॥

Translation

The embodied souls in this material world are My eternal fragmental parts. But bound by material nature, they are struggling with the six senses including the mind.

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English Translation Of Sri Shankaracharya’s Sanskrit Commentary By Swami Gambirananda

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