श्रीभगवानुवाच |
मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते |
श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मता: || 2||

śhrī-bhagavān uvācha
mayy āveśhya mano ye māṁ nitya-yuktā upāsate
śhraddhayā parayopetās te me yuktatamā matāḥ

Audio

https://www.bharattemples.com/wp-content/uploads/bt/2020/10/12-2.MP3.mp3

भावार्थ:

श्री भगवान बोले- मुझमें मन को एकाग्र करके निरंतर मेरे भजन-ध्यान में लगे हुए (अर्थात गीता अध्याय 11 श्लोक 55 में लिखे हुए प्रकार से निरन्तर मेरे में लगे हुए) जो भक्तजन अतिशय श्रेष्ठ श्रद्धा से युक्त होकर मुझ सगुणरूप परमेश्वर को भजते हैं, वे मुझको योगियों में अति उत्तम योगी मान्य हैं॥2॥

Translation

The Blessed Lord said: Those who fix their minds on Me and always engage in My devotion with steadfast faith, I consider them to be the best yogis.

https://www.bharattemples.com/wp-content/uploads/bt/2020/10/12.2.mp3

English Translation Of Sri Shankaracharya’s Sanskrit Commentary By Swami Gambirananda

Browse Temples in India