तत: पदं तत्परिमार्गितव्यं
यस्मिन्गता न निवर्तन्ति भूय: |
तमेव चाद्यं पुरुषं प्रपद्ये
यत: प्रवृत्ति: प्रसृता पुराणी || 4||

tataḥ padaṁ tat parimārgitavyaṁ
yasmin gatā na nivartanti bhūyaḥ
tam eva chādyaṁ puruṣhaṁ prapadye
yataḥ pravṛittiḥ prasṛitā purāṇī

Audio

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भावार्थ:

उसके पश्चात उस परम-पदरूप परमेश्वर को भलीभाँति खोजना चाहिए, जिसमें गए हुए पुरुष फिर लौटकर संसार में नहीं आते और जिस परमेश्वर से इस पुरातन संसार वृक्ष की प्रवृत्ति विस्तार को प्राप्त हुई है, उसी आदिपुरुष नारायण के मैं शरण हूँ- इस प्रकार दृढ़ निश्चय करके उस परमेश्वर का मनन और निदिध्यासन करना चाहिए॥4॥

Translation

which is the Supreme Lord, from whom streamed forth the activity of the universe a long time ago. Upon taking refuge in Him, one will not return to this world again.

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English Translation Of Sri Shankaracharya’s Sanskrit Commentary By Swami Gambirananda