मृत्यु: सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च भविष्यताम् |
कीर्ति: श्रीर्वाक्च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृति: क्षमा || 34||

mṛityuḥ sarva-haraśh chāham udbhavaśh cha bhaviṣhyatām
kīrtiḥ śhrīr vāk cha nārīṇāṁ smṛitir medhā dhṛitiḥ kṣhamā

Audio

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भावार्थ:

मैं सबका नाश करने वाला मृत्यु और उत्पन्न होने वालों का उत्पत्ति हेतु हूँ तथा स्त्रियों में कीर्ति (कीर्ति आदि ये सात देवताओं की स्त्रियाँ और स्त्रीवाचक नाम वाले गुण भी प्रसिद्ध हैं, इसलिए दोनों प्रकार से ही भगवान की विभूतियाँ हैं), श्री, वाक्‌, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा हूँ॥34॥

Translation

I am the all-devouring Death, and I am the origin of those things that are yet to be. Amongst feminine qualities I am fame, prosperity, fine speech, memory, intelligence, courage, and forgiveness.

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English Translation Of Sri Shankaracharya’s Sanskrit Commentary By Swami Gambirananda