चिन्तामपरिमेयां च प्रलयान्तामुपाश्रिता: |कामोपभोगपरमा एतावदिति निश्चिता: || 11 chintām aparimeyāṁ cha pralayāntām upāśhritāḥkāmopabhoga-paramā etāvad iti niśhchitāḥ Audio भावार्थ: तथा वे मृत्युपर्यन्त रहने वाली असंख्य चिन्ताओं का आश्रय लेने वाले, विषयभोगों के भोगने में तत्पर रहने वाले और ‘इतना ही सुख है’ इस प्रकार मानने वाले होते हैं॥11॥ Translation They are obsessed with endless anxieties that […]
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Bhagavad Gita: Chapter 16, Verse 10
काममाश्रित्य दुष्पूरं दम्भमानमदान्विता: |मोहाद्गृहीत्वासद्ग्राहान्प्रवर्तन्तेऽशुचिव्रता: || 10|| kāmam āśhritya duṣhpūraṁ dambha-māna-madānvitāḥmohād gṛihītvāsad-grāhān pravartante ’śhuchi-vratāḥ Audio भावार्थ: वे दम्भ, मान और मद से युक्त मनुष्य किसी प्रकार भी पूर्ण न होने वाली कामनाओं का आश्रय लेकर, अज्ञान से मिथ्या सिद्धांतों को ग्रहण करके भ्रष्ट आचरणों को धारण करके संसार में विचरते हैं॥10॥ Translation Harboring insatiable lust, full […]
Bhagavad Gita: Chapter 16, Verse 9
एतां दृष्टिमवष्टभ्य नष्टात्मानोऽल्पबुद्धय: |प्रभवन्त्युग्रकर्माण: क्षयाय जगतोऽहिता: || 9|| etāṁ dṛiṣhṭim avaṣhṭabhya naṣhṭātmāno ’lpa-buddhayaḥprabhavanty ugra-karmāṇaḥ kṣhayāya jagato ’hitāḥ Audio भावार्थ: इस मिथ्या ज्ञान को अवलम्बन करके- जिनका स्वभाव नष्ट हो गया है तथा जिनकी बुद्धि मन्द है, वे सब अपकार करने वाले क्रुरकर्मी मनुष्य केवल जगत् के नाश के लिए ही समर्थ होते हैं॥9॥ Translation Holding […]
Bhagavad Gita: Chapter 16, Verse 8
असत्यमप्रतिष्ठं ते जगदाहुरनीश्वरम् |अपरस्परसम्भूतं किमन्यत्कामहैतुकम् || 8|| asatyam apratiṣhṭhaṁ te jagad āhur anīśhvaramaparaspara-sambhūtaṁ kim anyat kāma-haitukam Audio भावार्थ: वे आसुरी प्रकृति वाले मनुष्य कहा करते हैं कि जगत् आश्रयरहित, सर्वथा असत्य और बिना ईश्वर के, अपने-आप केवल स्त्री-पुरुष के संयोग से उत्पन्न है, अतएव केवल काम ही इसका कारण है। इसके सिवा और क्या है?॥8॥ […]
Bhagavad Gita: Chapter 16, Verse 7
प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च जना न विदुरासुरा: |न शौचं नापि चाचारो न सत्यं तेषु विद्यते || 7|| pravṛittiṁ cha nivṛittiṁ cha janā na vidur āsurāḥna śhauchaṁ nāpi chāchāro na satyaṁ teṣhu vidyate Audio भावार्थ: आसुर स्वभाव वाले मनुष्य प्रवृत्ति और निवृत्ति- इन दोनों को ही नहीं जानते। इसलिए उनमें न तो बाहर-भीतर की शुद्धि है, […]
Bhagavad Gita: Chapter 16, Verse 6
द्वौ भूतसर्गौ लोकेऽस्मिन्दैव आसुर एव च |दैवो विस्तरश: प्रोक्त आसुरं पार्थ मे शृणु || 6|| dvau bhūta-sargau loke ’smin daiva āsura eva chadaivo vistaraśhaḥ prokta āsuraṁ pārtha me śhṛiṇu Audio भावार्थ: हे अर्जुन! इस लोक में भूतों की सृष्टि यानी मनुष्य समुदाय दो ही प्रकार का है, एक तो दैवी प्रकृति वाला और दूसरा आसुरी […]
Bhagavad Gita: Chapter 16, Verse 5
दैवी सम्पद्विमोक्षाय निबन्धायासुरी मता |मा शुच: सम्पदं दैवीमभिजातोऽसि पाण्डव || 5|| daivī sampad vimokṣhāya nibandhāyāsurī matāmā śhuchaḥ sampadaṁ daivīm abhijāto ’si pāṇḍava Audio भावार्थ: दैवी सम्पदा मुक्ति के लिए और आसुरी सम्पदा बाँधने के लिए मानी गई है। इसलिए हे अर्जुन! तू शोक मत कर, क्योंकि तू दैवी सम्पदा को लेकर उत्पन्न हुआ है॥5॥ Translation […]
Bhagavad Gita: Chapter 16, Verse 4
दम्भो दर्पोऽभिमानश्च क्रोध: पारुष्यमेव च |अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ सम्पदमासुरीम् || 4|| dambho darpo ’bhimānaśh cha krodhaḥ pāruṣhyam eva chaajñānaṁ chābhijātasya pārtha sampadam āsurīm Audio भावार्थ: हे पार्थ! दम्भ, घमण्ड और अभिमान तथा क्रोध, कठोरता और अज्ञान भी- ये सब आसुरी सम्पदा को लेकर उत्पन्न हुए पुरुष के लक्षण हैं॥4॥ Translation O Parth, the qualities of […]
Bhagavad Gita: Chapter 16, Verse 3
तेज: क्षमा धृति: शौचमद्रोहोनातिमानिता |भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत || 3|| tejaḥ kṣhamā dhṛitiḥ śhaucham adroho nāti-mānitābhavanti sampadaṁ daivīm abhijātasya bhārata Audio भावार्थ: तेज (श्रेष्ठ पुरुषों की उस शक्ति का नाम ‘तेज’ है कि जिसके प्रभाव से उनके सामने विषयासक्त और नीच प्रकृति वाले मनुष्य भी प्रायः अन्यायाचरण से रुककर उनके कथनानुसार श्रेष्ठ कर्मों में प्रवृत्त […]
Bhagavad Gita: Chapter 16, Verse 2
अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्याग: शान्तिरपैशुनम् |दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम् || 2|| ahinsā satyam akrodhas tyāgaḥ śhāntir apaiśhunamdayā bhūteṣhv aloluptvaṁ mārdavaṁ hrīr achāpalam Audio भावार्थ: भावार्थ : मन, वाणी और शरीर से किसी प्रकार भी किसी को कष्ट न देना, यथार्थ और प्रिय भाषण (अन्तःकरण और इन्द्रियों के द्वारा जैसा निश्चय किया हो, वैसे-का-वैसा ही प्रिय शब्दों में […]
