सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि |ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शन: || 29|| sarva-bhūta-stham ātmānaṁ sarva-bhūtāni chātmaniīkṣhate yoga-yuktātmā sarvatra sama-darśhanaḥ Audio भावार्थ: सर्वव्यापी अनंत चेतन में एकीभाव से स्थिति रूप योग से युक्त आत्मा वाला तथा सब में समभाव से देखने वाला योगी आत्मा को सम्पूर्ण भूतों में स्थित और सम्पूर्ण भूतों को आत्मा में कल्पित देखता है॥29॥ Translation […]
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Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 28
युञ्जन्नेवं सदात्मानं योगी विगतकल्मष: |सुखेन ब्रह्मसंस्पर्शमत्यन्तं सुखमश्नुते || 28|| yuñjann evaṁ sadātmānaṁ yogī vigata-kalmaṣhaḥsukhena brahma-sansparśham atyantaṁ sukham aśhnute Audio भावार्थ: वह पापरहित योगी इस प्रकार निरंतर आत्मा को परमात्मा में लगाता हुआ सुखपूर्वक परब्रह्म परमात्मा की प्राप्ति रूप अनन्त आनंद का अनुभव करता है॥28॥ Translation The self-controlled yogi, thus uniting the self with God, becomes […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 27
प्रशान्तमनसं ह्येनं योगिनं सुखमुत्तमम् |उपैति शान्तरजसं ब्रह्मभूतमकल्मषम् || 27|| praśhānta-manasaṁ hyenaṁ yoginaṁ sukham uttamamupaiti śhānta-rajasaṁ brahma-bhūtam akalmaṣham Audio भावार्थ: क्योंकि जिसका मन भली प्रकार शांत है, जो पाप से रहित है और जिसका रजोगुण शांत हो गया है, ऐसे इस सच्चिदानन्दघन ब्रह्म के साथ एकीभाव हुए योगी को उत्तम आनंद प्राप्त होता है॥27॥ Translation Great […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 26
यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम् |ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत् || 26|| yato yato niśhcharati manaśh chañchalam asthiramtatas tato niyamyaitad ātmanyeva vaśhaṁ nayet Audio भावार्थ: यह स्थिर न रहने वाला और चंचल मन जिस-जिस शब्दादि विषय के निमित्त से संसार में विचरता है, उस-उस विषय से रोककर यानी हटाकर इसे बार-बार परमात्मा में ही निरुद्ध करे॥26॥ Translation […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 25
शनै: शनैरुपरमेद्बुद्ध्या धृतिगृहीतया |आत्मसंस्थं मन: कृत्वा न किञ्चिदपि चिन्तयेत् || 25|| śhanaiḥ śhanair uparamed buddhyā dhṛiti-gṛihītayāātma-sansthaṁ manaḥ kṛitvā na kiñchid api chintayet Audio भावार्थ: क्रम-क्रम से अभ्यास करता हुआ उपरति को प्राप्त हो तथा धैर्ययुक्त बुद्धि द्वारा मन को परमात्मा में स्थित करके परमात्मा के सिवा और कुछ भी चिन्तन न करे॥25॥ Translation Slowly and […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 24
सङ्कल्पप्रभवान्कामांस्त्यक्त्वा सर्वानशेषत: |मनसैवेन्द्रियग्रामं विनियम्य समन्तत: || 24|| saṅkalpa-prabhavān kāmāns tyaktvā sarvān aśheṣhataḥmanasaivendriya-grāmaṁ viniyamya samantataḥ Audio भावार्थ: संकल्प से उत्पन्न होने वाली सम्पूर्ण कामनाओं को निःशेष रूप से त्यागकर और मन द्वारा इन्द्रियों के समुदाय को सभी ओर से भलीभाँति रोककर॥24॥ Translation Completely renouncing all desires arising from thoughts of the world, one should restrain the […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 23
तं विद्याद् दु:खसंयोगवियोगं योगसञ्ज्ञितम् |स निश्चयेन योक्तव्यो योगोऽनिर्विण्णचेतसा || 23|| taṁ vidyād duḥkha-sanyoga-viyogaṁ yogasaṅjñitamsa niśhchayena yoktavyo yogo ’nirviṇṇa-chetasā Audio भावार्थ: जो दुःखरूप संसार के संयोग से रहित है तथा जिसका नाम योग है, उसको जानना चाहिए। वह योग न उकताए हुए अर्थात धैर्य और उत्साहयुक्त चित्त से निश्चयपूर्वक करना कर्तव्य है॥23॥ Translation That state of […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 22
यं लब्ध्वा चापरं लाभं मन्यते नाधिकं तत: |यस्मिन्स्थितो न दु:खेन गुरुणापि विचाल्यते || 22|| yaṁ labdhvā chāparaṁ lābhaṁ manyate nādhikaṁ tataḥyasmin sthito na duḥkhena guruṇāpi vichālyate Audio भावार्थ: परमात्मा की प्राप्ति रूप जिस लाभ को प्राप्त होकर उसे अधिक दूसरा कुछ भी लाभ नहीं मानता और परमात्मा प्राप्ति रूप जिस अवस्था में स्थित योगी बड़े […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 21
सुखमात्यन्तिकं यत्तद्बुद्धिग्राह्यमतीन्द्रियम् |वेत्ति यत्र न चैवायं स्थितश्चलति तत्वत: || 21|| sukham ātyantikaṁ yat tad buddhi-grāhyam atīndriyamvetti yatra na chaivāyaṁ sthitaśh chalati tattvataḥ Audio भावार्थ: इन्द्रियों से अतीत, केवल शुद्ध हुई सूक्ष्म बुद्धि द्वारा ग्रहण करने योग्य जो अनन्त आनन्द है, उसको जिस अवस्था में अनुभव करता है, और जिस अवस्था में स्थित यह योगी परमात्मा […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 20
यत्रोपरमते चित्तं निरुद्धं योगसेवया |यत्र चैवात्मनात्मानं पश्यन्नात्मनि तुष्यति || 20|| yatroparamate chittaṁ niruddhaṁ yoga-sevayāyatra chaivātmanātmānaṁ paśhyann ātmani tuṣhyati Audio भावार्थ: योग के अभ्यास से निरुद्ध चित्त जिस अवस्था में उपराम हो जाता है और जिस अवस्था में परमात्मा के ध्यान से शुद्ध हुई सूक्ष्म बुद्धि द्वारा परमात्मा को साक्षात करता हुआ सच्चिदानन्दघन परमात्मा में ही […]
