इहैव तैर्जित: सर्गो येषां साम्ये स्थितं मन: |निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद् ब्रह्मणि ते स्थिता: || 19|| ihaiva tair jitaḥ sargo yeṣhāṁ sāmye sthitaṁ manaḥnirdoṣhaṁ hi samaṁ brahma tasmād brahmaṇi te sthitāḥ Audio भावार्थ: जिनका मन समभाव में स्थित है, उनके द्वारा इस जीवित अवस्था में ही सम्पूर्ण संसार जीत लिया गया है क्योंकि सच्चिदानन्दघन […]
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Bhagavad Gita: Chapter 5, Verse 18
विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि |शुनि चैव श्वपाके च पण्डिता: समदर्शिन: || 18|| vidyā-vinaya-sampanne brāhmaṇe gavi hastiniśhuni chaiva śhva-pāke cha paṇḍitāḥ sama-darśhinaḥ Audio भावार्थ: वे ज्ञानीजन विद्या और विनययुक्त ब्राह्मण में तथा गौ, हाथी, कुत्ते और चाण्डाल में भी समदर्शी (इसका विस्तार गीता अध्याय 6 श्लोक 32 की टिप्पणी में देखना चाहिए।) ही होते हैं॥18॥ Translation […]
Bhagavad Gita: Chapter 5, Verse 17
तद्बुद्धयस्तदात्मानस्तन्निष्ठास्तत्परायणा: |गच्छन्त्यपुनरावृत्तिं ज्ञाननिर्धूतकल्मषा: || 17|| tad-buddhayas tad-ātmānas tan-niṣhṭhās tat-parāyaṇāḥgachchhantyapunar-āvṛittiṁ jñāna-nirdhūta-kalmaṣhāḥ Audio भावार्थ: जिनका मन तद्रूप हो रहा है, जिनकी बुद्धि तद्रूप हो रही है और सच्चिदानन्दघन परमात्मा में ही जिनकी निरंतर एकीभाव से स्थिति है, ऐसे तत्परायण पुरुष ज्ञान द्वारा पापरहित होकर अपुनरावृत्ति को अर्थात परमगति को प्राप्त होते हैं॥17॥ Translation Those whose intellect is […]
Bhagavad Gita: Chapter 5, Verse 16
ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मन: |तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम् || 16|| jñānena tu tad ajñānaṁ yeṣhāṁ nāśhitam ātmanaḥteṣhām āditya-vaj jñānaṁ prakāśhayati tat param Audio भावार्थ: परन्तु जिनका वह अज्ञान परमात्मा के तत्व ज्ञान द्वारा नष्ट कर दिया गया है, उनका वह ज्ञान सूर्य के सदृश उस सच्चिदानन्दघन परमात्मा को प्रकाशित कर देता है॥16॥ Translation But for […]
Bhagavad Gita: Chapter 5, Verse 15
नादत्ते कस्यचित्पापं न चैव सुकृतं विभु: |अज्ञानेनावृतं ज्ञानं तेन मुह्यन्ति जन्तव: || 15|| nādatte kasyachit pāpaṁ na chaiva sukṛitaṁ vibhuḥajñānenāvṛitaṁ jñānaṁ tena muhyanti jantavaḥ Audio भावार्थ: सर्वव्यापी परमेश्वर भी न किसी के पाप कर्म को और न किसी के शुभकर्म को ही ग्रहण करता है, किन्तु अज्ञान द्वारा ज्ञान ढँका हुआ है, उसी से सब […]
Bhagavad Gita: Chapter 5, Verse 14
न कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य सृजति प्रभु: |न कर्मफलसंयोगं स्वभावस्तु प्रवर्तते || 14|| na kartṛitvaṁ na karmāṇi lokasya sṛijati prabhuḥna karma-phala-saṅyogaṁ svabhāvas tu pravartate Audio भावार्थ: : परमेश्वर मनुष्यों के न तो कर्तापन की, न कर्मों की और न कर्मफल के संयोग की रचना करते हैं, किन्तु स्वभाव ही बर्त रहा है॥ Translation Neither the […]
Bhagavad Gita: Chapter 5, Verse 13
सर्वकर्माणि मनसा संन्यस्यास्ते सुखं वशी |नवद्वारे पुरे देही नैव कुर्वन्न कारयन् || 13|| sarva-karmāṇi manasā sannyasyāste sukhaṁ vaśhīnava-dvāre pure dehī naiva kurvan na kārayan Audio भावार्थ: अन्तःकरण जिसके वश में है, ऐसा सांख्य योग का आचरण करने वाला पुरुष न करता हुआ और न करवाता हुआ ही नवद्वारों वाले शरीर रूप घर में सब कर्मों […]
Bhagavad Gita: Chapter 5, Verse 12
युक्त: कर्मफलं त्यक्त्वा शान्तिमाप्नोति नैष्ठिकीम् |अयुक्त: कामकारेण फले सक्तो निबध्यते || 12|| yuktaḥ karma-phalaṁ tyaktvā śhāntim āpnoti naiṣhṭhikīmayuktaḥ kāma-kāreṇa phale sakto nibadhyate Audio भावार्थ: कर्मयोगी कर्मों के फल का त्याग करके भगवत्प्राप्ति रूप शान्ति को प्राप्त होता है और सकामपुरुष कामना की प्रेरणा से फल में आसक्त होकर बँधता है॥12॥ Translation Offering the results of […]
Bhagavad Gita: Chapter 5, Verse 11
कायेन मनसा बुद्ध्या केवलैरिन्द्रियैरपि |योगिन: कर्म कुर्वन्ति सङ्गं त्यक्त्वात्मशुद्धये || 11|| kāyena manasā buddhyā kevalair indriyair apiyoginaḥ karma kurvanti saṅgaṁ tyaktvātma-śhuddhaye Audio भावार्थ: कर्मयोगी ममत्वबुद्धिरहित केवल इन्द्रिय, मन, बुद्धि और शरीर द्वारा भी आसक्ति को त्याग कर अन्तःकरण की शुद्धि के लिए कर्म करते हैं॥11॥ Translation The yogis, while giving up attachment, perform actions with […]
Bhagavad Gita: Chapter 5, Verse 10
ब्रह्मण्याधाय कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा करोति य: |लिप्यते न स पापेन पद्मपत्रमिवाम्भसा || 10|| brahmaṇyādhāya karmāṇi saṅgaṁ tyaktvā karoti yaḥlipyate na sa pāpena padma-patram ivāmbhasā Audio भावार्थ: जो पुरुष सब कर्मों को परमात्मा में अर्पण करके और आसक्ति को त्याग कर कर्म करता है, वह पुरुष जल से कमल के पत्ते की भाँति पाप से लिप्त […]
