अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक् |
साधुरेव स मन्तव्य: सम्यग्व्यवसितो हि स: || 30||

api chet su-durāchāro bhajate mām ananya-bhāk
sādhur eva sa mantavyaḥ samyag vyavasito hi saḥ

Audio

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भावार्थ:

यदि कोई अतिशय दुराचारी भी अनन्य भाव से मेरा भक्त होकर मुझको भजता है तो वह साधु ही मानने योग्य है, क्योंकि वह यथार्थ निश्चय वाला है। अर्थात्‌ उसने भली भाँति निश्चय कर लिया है कि परमेश्वर के भजन के समान अन्य कुछ भी नहीं है॥30॥

Translation

Even if the vilest sinners worship Me with exclusive devotion, they are to be considered righteous, for they have made the proper resolve.

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English Translation Of Sri Shankaracharya’s Sanskrit Commentary By Swami Gambirananda