सदृशं चेष्टते स्वस्या: प्रकृतेर्ज्ञानवानपि |प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रह: किं करिष्यति || 33|| sadṛiśhaṁ cheṣhṭate svasyāḥ prakṛiter jñānavān apiprakṛitiṁ yānti bhūtāni nigrahaḥ kiṁ kariṣhyati Audio भावार्थ: सभी प्राणी प्रकृति को प्राप्त होते हैं अर्थात अपने स्वभाव के परवश हुए कर्म करते हैं। ज्ञानवान् भी अपनी प्रकृति के अनुसार चेष्टा करता है। फिर इसमें किसी का हठ […]
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Bhagavad Gita: Chapter 3, Verse 32
ये त्वेतदभ्यसूयन्तो नानुतिष्ठन्ति मे मतम् |सर्वज्ञानविमूढांस्तान्विद्धि नष्टानचेतस: || 32|| ye tvetad abhyasūyanto nānutiṣhṭhanti me matamsarva-jñāna-vimūḍhāns tān viddhi naṣhṭān achetasaḥ Audio भावार्थ: परन्तु जो मनुष्य मुझमें दोषारोपण करते हुए मेरे इस मत के अनुसार नहीं चलते हैं, उन मूर्खों को तू सम्पूर्ण ज्ञानों में मोहित और नष्ट हुए ही समझ॥32॥ Translation But those who find faults […]
Bhagavad Gita: Chapter 3, Verse 31
ये मे मतमिदं नित्यमनुतिष्ठन्ति मानवा: |श्रद्धावन्तोऽनसूयन्तो मुच्यन्ते तेऽपि कर्मभि: || 31|| ye me matam idaṁ nityam anutiṣhṭhanti mānavāḥśhraddhāvanto ’nasūyanto muchyante te ’pi karmabhiḥ Audio भावार्थ: जो कोई मनुष्य दोषदृष्टि से रहित और श्रद्धायुक्त होकर मेरे इस मत का सदा अनुसरण करते हैं, वे भी सम्पूर्ण कर्मों से छूट जाते हैं॥31॥ Translation Those who abide by […]
Bhagavad Gita: Chapter 3, Verse 30
मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याध्यात्मचेतसा |निराशीर्निनर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वर: || 30|| mayi sarvāṇi karmāṇi sannyasyādhyātma-chetasānirāśhīr nirmamo bhūtvā yudhyasva vigata-jvaraḥ Audio भावार्थ: मुझ अन्तर्यामी परमात्मा में लगे हुए चित्त द्वारा सम्पूर्ण कर्मों को मुझमें अर्पण करके आशारहित, ममतारहित और सन्तापरहित होकर युद्ध कर॥30॥ Translation Performing all works as an offering unto me, constantly meditate on me as […]
Bhagavad Gita: Chapter 3, Verse 29
प्रकृतेर्गुणसम्मूढा: सज्जन्ते गुणकर्मसु |तानकृत्स्नविदो मन्दान्कृत्स्नविन्न विचालयेत् || 29|| prakṛiter guṇa-sammūḍhāḥ sajjante guṇa-karmasutān akṛitsna-vido mandān kṛitsna-vin na vichālayet Audio भावार्थ: प्रकृति के गुणों से अत्यन्त मोहित हुए मनुष्य गुणों में और कर्मों में आसक्त रहते हैं, उन पूर्णतया न समझने वाले मन्दबुद्धि अज्ञानियों को पूर्णतया जानने वाला ज्ञानी विचलित न करे॥29॥ Translation Those who are deluded […]
Bhagavad Gita: Chapter 3, Verse 28
तत्ववित्तु महाबाहो गुणकर्मविभागयो: |गुणा गुणेषु वर्तन्त इति मत्वा न सज्जते || 28|| tattva-vit tu mahā-bāho guṇa-karma-vibhāgayoḥguṇā guṇeṣhu vartanta iti matvā na sajjate Audio भावार्थ: परन्तु हे महाबाहो! गुण विभाग और कर्म विभाग (त्रिगुणात्मक माया के कार्यरूप पाँच महाभूत और मन, बुद्धि, अहंकार तथा पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ और शब्दादि पाँच विषय- इन सबके समुदाय का […]
Bhagavad Gita: Chapter 3, Verse 27
प्रकृते: क्रियमाणानि गुणै: कर्माणि सर्वश: |अहङ्कारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते || 27|| prakṛiteḥ kriyamāṇāni guṇaiḥ karmāṇi sarvaśhaḥahankāra-vimūḍhātmā kartāham iti manyate Audio भावार्थ: वास्तव में सम्पूर्ण कर्म सब प्रकार से प्रकृति के गुणों द्वारा किए जाते हैं, तो भी जिसका अन्तःकरण अहंकार से मोहित हो रहा है, ऐसा अज्ञानी ‘मैं कर्ता हूँ’ ऐसा मानता है॥27॥ Translation All activities […]
Bhagavad Gita: Chapter 3, Verse 26
न बुद्धिभेदं जनयेदज्ञानां कर्मसङ्गिनाम् |जोषयेत्सर्वकर्माणि विद्वान्युक्त: समाचरन् || 26|| na buddhi-bhedaṁ janayed ajñānāṁ karma-saṅgināmjoṣhayet sarva-karmāṇi vidvān yuktaḥ samācharan Audio भावार्थ: परमात्मा के स्वरूप में अटल स्थित हुए ज्ञानी पुरुष को चाहिए कि वह शास्त्रविहित कर्मों में आसक्ति वाले अज्ञानियों की बुद्धि में भ्रम अर्थात कर्मों में अश्रद्धा उत्पन्न न करे, किन्तु स्वयं शास्त्रविहित समस्त कर्म […]
Bhagavad Gita: Chapter 3, Verse 25
सक्ता: कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत |कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसंग्रहम् || 25|| saktāḥ karmaṇyavidvānso yathā kurvanti bhāratakuryād vidvāns tathāsaktaśh chikīrṣhur loka-saṅgraham Audio भावार्थ: हे भारत! कर्म में आसक्त हुए अज्ञानीजन जिस प्रकार कर्म करते हैं, आसक्तिरहित विद्वान भी लोकसंग्रह करना चाहता हुआ उसी प्रकार कर्म करे॥25॥ Translation As ignorant people perform their duties with attachment to the results, O […]
Bhagavad Gita: Chapter 3, Verse 24
उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्यां कर्म चेदहम् |सङ्करस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमा: प्रजा: || 24|| utsīdeyur ime lokā na kuryāṁ karma ched ahamsankarasya cha kartā syām upahanyām imāḥ prajāḥ Audio भावार्थ: इसलिए यदि मैं कर्म न करूँ तो ये सब मनुष्य नष्ट-भ्रष्ट हो जाएँ और मैं संकरता का करने वाला होऊँ तथा इस समस्त प्रजा को नष्ट […]
