Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 25

अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते | तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि || 25|| avyakto ’yam achintyo ’yam avikāryo ’yam uchyatetasmādevaṁ viditvainaṁ nānuśhochitum arhasi भावार्थ: यह आत्मा अव्यक्त है, यह आत्मा अचिन्त्य है और यह आत्मा विकाररहित कहा जाता है। इससे हे अर्जुन! इस आत्मा को उपर्युक्त प्रकार से जानकर तू शोक करने के योग्य नहीं है अर्थात्‌ तुझे शोक करना उचित […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 24

अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च | नित्य: सर्वगत: स्थाणुरचलोऽयं सनातन: || 24|| achchhedyo ’yam adāhyo ’yam akledyo ’śhoṣhya eva chanityaḥ sarva-gataḥ sthāṇur achalo ’yaṁ sanātanaḥ भावार्थ: : क्योंकि यह आत्मा अच्छेद्य है, यह आत्मा अदाह्य, अक्लेद्य और निःसंदेह अशोष्य है तथा यह आत्मा नित्य, सर्वव्यापी, अचल, स्थिर रहने वाला और सनातन है॥24॥ Translation The soul is unbreakable […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 23

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: | न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत: || 23|| nainaṁ chhindanti śhastrāṇi nainaṁ dahati pāvakaḥna chainaṁ kledayantyāpo na śhoṣhayati mārutaḥ भावार्थ: इस आत्मा को शस्त्र नहीं काट सकते, इसको आग नहीं जला सकती, इसको जल नहीं गला सकता और वायु नहीं सुखा सकता॥23॥ Translation Weapons cannot shred the soul, […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 22

वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि | तथा शरीराणि विहाय जीर्णा न्यन्यानि संयाति नवानि देही || 22|| vāsānsi jīrṇāni yathā vihāyanavāni gṛihṇāti naro ’parāṇitathā śharīrāṇi vihāya jīrṇānyanyāni sanyāti navāni dehī भावार्थ: जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर दूसरे नए वस्त्रों को ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्यागकर दूसरे नए शरीरों […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 21

वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम् | कथं स पुरुष: पार्थ कं घातयति हन्ति कम् || 21|| vedāvināśhinaṁ nityaṁ ya enam ajam avyayamkathaṁ sa puruṣhaḥ pārtha kaṁ ghātayati hanti kam भावार्थ: हे पृथापुत्र अर्जुन! जो पुरुष इस आत्मा को नाशरहित, नित्य, अजन्मा और अव्यय जानता है, वह पुरुष कैसे किसको मरवाता है और कैसे किसको मारता है?॥21॥ […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 20

न जायते म्रियते वा कदाचि नायं भूत्वा भविता वा न भूय: | अजो नित्य: शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे || 20|| na jāyate mriyate vā kadāchinnāyaṁ bhūtvā bhavitā vā na bhūyaḥajo nityaḥ śhāśhvato ’yaṁ purāṇona hanyate hanyamāne śharīre भावार्थ: यह आत्मा किसी काल में भी न तो जन्मता है और न मरता ही है […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 19

य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम् | उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते || 19|| ya enaṁ vetti hantāraṁ yaśh chainaṁ manyate hatamubhau tau na vijānīto nāyaṁ hanti na hanyate भावार्थ: जो इस आत्मा को मारने वाला समझता है तथा जो इसको मरा मानता है, वे दोनों ही नहीं जानते क्योंकि यह […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 18

Chapter 2, Verse 18 अन्तवन्त इमे देहा नित्यस्योक्ता: शरीरिण: | अनाशिनोऽप्रमेयस्य तस्माद्युध्यस्व भारत || 2.18 || Antavanta ime dehāḥ nityasya uktāḥ śarīriṇaḥAnāśino ’prameyasya tasmād yudhyasva Bhārata भावार्थ: इस नाशरहित, अप्रमेय, नित्यस्वरूप जीवात्मा के ये सब शरीर नाशवान कहे गए हैं, इसलिए हे भरतवंशी अर्जुन! तू युद्ध कर॥18॥ Translation Only the material body is perishable; the […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 17

Chapter 2, Verse 17 अविनाशि तु तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम् | विनाशमव्ययस्यास्य न कश्चित्कर्तुमर्हति || 2.17 || avināśhi tu tadviddhi yena sarvam idaṁ tatamvināśham avyayasyāsya na kaśhchit kartum arhati भावार्थ: नाशरहित तो तू उसको जान, जिससे यह सम्पूर्ण जगत्‌- दृश्यवर्ग व्याप्त है। इस अविनाशी का विनाश करने में कोई भी समर्थ नहीं है॥17॥ Translation That […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 16

Chapter 2, Verse 16 नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सत: | उभयोरपि दृष्टोऽन्तस्त्वनयोस्तत्वदर्शिभि: || 2.16 || nāsato vidyate bhāvo nābhāvo vidyate sataḥubhayorapi dṛiṣhṭo ’nta stvanayos tattva-darśhibhiḥ भावार्थ: असत्‌ वस्तु की तो सत्ता नहीं है और सत्‌ का अभाव नहीं है। इस प्रकार इन दोनों का ही तत्व तत्वज्ञानी पुरुषों द्वारा देखा गया है॥16॥ Translation Of […]