ज्ञानं ज्ञेयं परिज्ञाता त्रिविधा कर्मचोदना | करणं कर्म कर्तेति त्रिविध: कर्मसंग्रह: | jñānaṁ jñeyaṁ parijñātā tri-vidhā karma-chodanākaraṇaṁ karma karteti tri-vidhaḥ karma-saṅgrahaḥ भावार्थ: ।।18.18।।ज्ञान? ज्ञेय और परिज्ञाता — इन तीनोंसे कर्मप्रेरणा होती है तथा करण? कर्म और कर्ता — इन तीनोंसे कर्मसंग्रह होता है। Translation Knowledge, the object of knowledge, and the knower—these are the three […]
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Bhagavad Gita: Chapter 18, Verse 19
ज्ञानं कर्म च कर्ता च त्रिधैव गुणभेदत: | प्रोच्यते गुणसङ् ख्याने यथावच्छृणु तान्यपि || jñānaṁ karma cha kartā cha tridhaiva guṇa-bhedataḥprochyate guṇa-saṅkhyāne yathāvach chhṛiṇu tāny api भावार्थ: गुणों की संख्या करने वाले शास्त्र में ज्ञान और कर्म तथा कर्त्ता गुणों के भेद से तीन-तीन प्रकार के ही कहे गये हैं, उनको भी तू मुझसे भली-भाँति […]
Bhagavad Gita: Chapter 18, Verse 20
सर्वभूतेषु येनैकं भावमव्ययमीक्षते | अविभक्तं विभक्तेषु तज्ज्ञानं विद्धि सात्विकम् || sarva-bhūteṣhu yenaikaṁ bhāvam avyayam īkṣhateavibhaktaṁ vibhakteṣhu taj jñānaṁ viddhi sāttvikam भावार्थ: जिस ज्ञान से मनुष्य पृथक-पृथक सब भूतों में एक अविनाशी परमात्मभाव को विभागरहित समभाव से स्थित देखता है, उस ज्ञान को तू सात्त्विक जान॥20॥ Translation Understand that knowledge to be in the mode of […]
Bhagavad Gita: Chapter 18, Verse 21
पृथक्त्वेन तु यज्ज्ञानं नानाभावान्पृथग्विधान् | वेत्ति सर्वेषु भूतेषु तज्ज्ञानं विद्धि राजसम् || pṛithaktvena tu yaj jñānaṁ nānā-bhāvān pṛithag-vidhānvetti sarveṣhu bhūteṣhu taj jñānaṁ viddhi rājasam भावार्थ: किन्तु जो ज्ञान अर्थात जिस ज्ञान के द्वारा मनुष्य सम्पूर्ण भूतों में भिन्न-भिन्न प्रकार के नाना भावों को अलग-अलग जानता है, उस ज्ञान को तू राजस जान॥21॥ Translation That knowledge […]
Bhagavad Gita: Chapter 18, Verse 22
यत्तु कृत्स्नवदेकस्मिन्कार्ये सक्तमहैतुकम् | अतत्वार्थवदल्पं च तत्तामसमुदाहृतम् || yat tu kṛitsna-vad ekasmin kārye saktam ahaitukamatattvārtha-vad alpaṁ cha tat tāmasam udāhṛitam भावार्थ: परन्तु जो ज्ञान एक कार्यरूप शरीर में ही सम्पूर्ण के सदृश आसक्त है तथा जो बिना युक्तिवाला, तात्त्विक अर्थ से रहित और तुच्छ है- वह तामस कहा गया है॥22॥ Translation That knowledge is said […]
Bhagavad Gita: Chapter 18, Verse 23
नियतं सङ्गरहितमरागद्वेषत: कृतम् | अफलप्रेप्सुना कर्म यतत्सात्विकमुच्यते || niyataṁ saṅga-rahitam arāga-dveṣhataḥ kṛitamaphala-prepsunā karma yat tat sāttvikam uchyate भावार्थ: जो कर्म शास्त्रविधि से नियत किया हुआ और कर्तापन के अभिमान से रहित हो तथा फल न चाहने वाले पुरुष द्वारा बिना राग-द्वेष के किया गया हो- वह सात्त्विक कहा जाता है॥23॥ Translation Action that is in […]
Bhagavad Gita: Chapter 18, Verse 24
यत्तुकामेप्सुना कर्म साहङ्कारेण वा पुन: | क्रियते बहुलायासं तद्राजसमुदाहृतम् || yat tu kāmepsunā karma sāhankāreṇa vā punaḥkriyate bahulāyāsaṁ tad rājasam udāhṛitam भावार्थ: परन्तु जो कर्म बहुत परिश्रम से युक्त होता है तथा भोगों को चाहने वाले पुरुष द्वारा या अहंकारयुक्त पुरुष द्वारा किया जाता है, वह कर्म राजस कहा गया है॥24॥ Translation Action that is […]
Bhagavad Gita: Chapter 18, Verse 25
अनुबन्धं क्षयं हिंसामनपेक्ष्य च पौरुषम् | मोहादारभ्यते कर्म यतत्तामसमुच्यते || anubandhaṁ kṣhayaṁ hinsām anapekṣhya cha pauruṣhammohād ārabhyate karma yat tat tāmasam uchyate भावार्थ: जो कर्म परिणाम, हानि, हिंसा और सामर्थ्य को न विचारकर केवल अज्ञान से आरंभ किया जाता है, वह तामस कहा जाता है॥25॥ Translation That action is declared to be in the mode […]
Bhagavad Gita: Chapter 18, Verse 26
मुक्तसङ्गोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वित: | सिद्ध्यसिद्ध्योर्निर्विकार: कर्ता सात्विक उच्यते || mukta-saṅgo ‘nahaṁ-vādī dhṛity-utsāha-samanvitaḥsiddhy-asiddhyor nirvikāraḥ kartā sāttvika uchyate भावार्थ: जो कर्ता संगरहित, अहंकार के वचन न बोलने वाला, धैर्य और उत्साह से युक्त तथा कार्य के सिद्ध होने और न होने में हर्ष -शोकादि विकारों से रहित है- वह सात्त्विक कहा जाता है॥26॥ Translation The performer is said […]
Bhagavad Gita: Chapter 18, Verse 27
रागी कर्मफलप्रेप्सुर्लुब्धो हिंसात्मकोऽशुचि: | हर्षशोकान्वित: कर्ता राजस: परिकीर्तित: || rāgī karma-phala-prepsur lubdho hinsātmako ‘śhuchiḥharṣha-śhokānvitaḥ kartā rājasaḥ parikīrtitaḥ भावार्थ: जो कर्ता आसक्ति से युक्त कर्मों के फल को चाहने वाला और लोभी है तथा दूसरों को कष्ट देने के स्वभाववाला, अशुद्धाचारी और हर्ष-शोक से लिप्त है वह राजस कहा गया है॥27॥ Translation The performer is considered […]
