ज्ञेयं यत्तत्प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वामृतमश्रुते |अनादिमत्परं ब्रह्म न सत्तन्नासदुच्यते || 13|| jñeyaṁ yat tat pravakṣhyāmi yaj jñātvāmṛitam aśhnuteanādi mat-paraṁ brahma na sat tan nāsad uchyate Audio भावार्थ: जो जानने योग्य है तथा जिसको जानकर मनुष्य परमानन्द को प्राप्त होता है, उसको भलीभाँति कहूँगा। वह अनादिवाला परमब्रह्म न सत् ही कहा जाता है, न असत् ही॥12॥ Translation I […]
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Bhagavad Gita: Chapter 13, Verse 12
अध्यात्मज्ञाननित्यत्वं तत्वज्ञानार्थदर्शनम् |एतज्ज्ञानमिति प्रोक्तमज्ञानं यदतोऽन्यथा || 12|| adhyātma-jñāna-nityatvaṁ tattva-jñānārtha-darśhanametaj jñānam iti proktam ajñānaṁ yad ato ’nyathā Audio भावार्थ: अध्यात्म ज्ञान में (जिस ज्ञान द्वारा आत्मवस्तु और अनात्मवस्तु जानी जाए, उस ज्ञान का नाम ‘अध्यात्म ज्ञान’ है) नित्य स्थिति और तत्वज्ञान के अर्थरूप परमात्मा को ही देखना- यह सब ज्ञान (इस अध्याय के श्लोक 7 से […]
Bhagavad Gita: Chapter 13, Verse 11
मयि चानन्ययोगेन भक्तिरव्यभिचारिणी |विविक्तदेशसेवित्वमरतिर्जनसंसदि || 11|| mayi chānanya-yogena bhaktir avyabhichāriṇīvivikta-deśha-sevitvam aratir jana-sansadi Audio भावार्थ: मुझ परमेश्वर में अनन्य योग द्वारा अव्यभिचारिणी भक्ति (केवल एक सर्वशक्तिमान परमेश्वर को ही अपना स्वामी मानते हुए स्वार्थ और अभिमान का त्याग करके, श्रद्धा और भाव सहित परमप्रेम से भगवान का निरन्तर चिन्तन करना ‘अव्यभिचारिणी’ भक्ति है) तथा एकान्त और […]
Bhagavad Gita: Chapter 13, Verse 10
असक्तिरनभिष्वङ्ग: पुत्रदारगृहादिषु |नित्यं च समचित्तत्वमिष्टानिष्टोपपत्तिषु || 10|| asaktir anabhiṣhvaṅgaḥ putra-dāra-gṛihādiṣhunityaṁ cha sama-chittatvam iṣhṭāniṣhṭopapattiṣhu Audio भावार्थ: पुत्र, स्त्री, घर और धन आदि में आसक्ति का अभाव, ममता का न होना तथा प्रिय और अप्रिय की प्राप्ति में सदा ही चित्त का सम रहना॥9॥ Translation Humbleness; freedom from hypocrisy; non-violence; forgiveness; simplicity; service of the Guru; cleanliness […]
Bhagavad Gita: Chapter 13, Verse 9
इन्द्रियार्थेषु वैराग्यमनहङ्कार एव च |जन्ममृत्युजराव्याधिदु:खदोषानुदर्शनम् || 9|| indriyārtheṣhu vairāgyam anahankāra eva chajanma-mṛityu-jarā-vyādhi-duḥkha-doṣhānudarśhanam Audio भावार्थ: इस लोक और परलोक के सम्पूर्ण भोगों में आसक्ति का अभाव और अहंकार का भी अभाव, जन्म, मृत्यु, जरा और रोग आदि में दुःख और दोषों का बार-बार विचार करना॥8॥ Translation Humbleness; freedom from hypocrisy; non-violence; forgiveness; simplicity; service of the […]
Bhagavad Gita: Chapter 13, Verse 8
अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम् |आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रह: || 8|| amānitvam adambhitvam ahinsā kṣhāntir ārjavamāchāryopāsanaṁ śhauchaṁ sthairyam ātma-vinigrahaḥ Audio भावार्थ: श्रेष्ठता के अभिमान का अभाव, दम्भाचरण का अभाव, किसी भी प्राणी को किसी प्रकार भी न सताना, क्षमाभाव, मन-वाणी आदि की सरलता, श्रद्धा-भक्ति सहित गुरु की सेवा, बाहर-भीतर की शुद्धि (सत्यतापूर्वक शुद्ध व्यवहार से द्रव्य की और उसके […]
Bhagavad Gita: Chapter 13, Verse 7
इच्छा द्वेष: सुखं दु:खं सङ्घातश्चेतना धृति: |एतत्क्षेत्रं समासेन सविकारमुदाहृतम् || 7|| chchhā dveṣhaḥ sukhaṁ duḥkhaṁ saṅghātaśh chetanā dhṛitiḥetat kṣhetraṁ samāsena sa-vikāram udāhṛitam Audio भावार्थ: तथा इच्छा, द्वेष, सुख, दुःख, स्थूल देहका पिण्ड, चेतना (शरीर और अन्तःकरण की एक प्रकार की चेतन-शक्ति।) और धृति (गीता अध्याय 18 श्लोक 34 व 35 तक देखना चाहिए।)– इस प्रकार […]
Bhagavad Gita: Chapter 13, Verse 6
महाभूतान्यङ्ककारो बुद्धिरव्यक्त मेव च |इन्द्रियाणि दशैकं च पञ्च चेन्द्रियगोचरा: || 6|| mahā-bhūtāny ahankāro buddhir avyaktam eva chaindriyāṇi daśhaikaṁ cha pañcha chendriya-gocharāḥ Audio भावार्थ: पाँच महाभूत, अहंकार, बुद्धि और मूल प्रकृति भी तथा दस इन्द्रियाँ, एक मन और पाँच इन्द्रियों के विषय अर्थात शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध॥5॥ Translation The field of activities is composed […]
Bhagavad Gita: Chapter 13, Verse 5
ऋषिभिर्बहुधा गीतं छन्दोभिर्विविधै: पृथक् |ब्रह्मसूत्रपदैश्चैव हेतुमद्भिर्विनिश्चितै: || 5 || ṛiṣhibhir bahudhā gītaṁ chhandobhir vividhaiḥ pṛithakbrahma-sūtra-padaiśh chaiva hetumadbhir viniśhchitaiḥ Audio भावार्थ: यह क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का तत्व ऋषियों द्वारा बहुत प्रकार से कहा गया है और विविध वेदमन्त्रों द्वारा भी विभागपूर्वक कहा गया है तथा भलीभाँति निश्चय किए हुए युक्तियुक्त ब्रह्मसूत्र के पदों द्वारा भी कहा […]
Bhagavad Gita: Chapter 13, Verse 4
तत्क्षेत्रं यच्च यादृक्च यद्विकारि यतश्च यत् |स च यो यत्प्रभावश्च तत्समासेन मे शृणु || 4|| tat kṣhetraṁ yach cha yādṛik cha yad-vikāri yataśh cha yatsa cha yo yat-prabhāvaśh cha tat samāsena me śhṛiṇu Audio भावार्थ: यह क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का तत्व ऋषियों द्वारा बहुत प्रकार से कहा गया है और विविध वेदमन्त्रों द्वारा भी विभागपूर्वक […]
