Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 8

अहं सर्वस्य प्रभवो मत्त: सर्वं प्रवर्तते |इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विता: || 8|| ahaṁ sarvasya prabhavo mattaḥ sarvaṁ pravartateiti matvā bhajante māṁ budhā bhāva-samanvitāḥ Audio भावार्थ: मैं वासुदेव ही संपूर्ण जगत्‌ की उत्पत्ति का कारण हूँ और मुझसे ही सब जगत्‌ चेष्टा करता है, इस प्रकार समझकर श्रद्धा और भक्ति से युक्त बुद्धिमान्‌ भक्तजन […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 7

एतां विभूतिं योगं च मम यो वेत्ति तत्वत: |सोऽविकम्पेन योगेन युज्यते नात्र संशय: || 7|| etāṁ vibhūtiṁ yogaṁ cha mama yo vetti tattvataḥso ’vikampena yogena yujyate nātra sanśhayaḥ Audio भावार्थ: जो पुरुष मेरी इस परमैश्वर्यरूप विभूति को और योगशक्ति को तत्त्व से जानता है (जो कुछ दृश्यमात्र संसार है वह सब भगवान की माया है […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 6

महर्षय: सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा |मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमा: प्रजा: || 6|| maharṣhayaḥ sapta pūrve chatvāro manavas tathāmad-bhāvā mānasā jātā yeṣhāṁ loka imāḥ prajāḥ Audio भावार्थ: सात महर्षिजन, चार उनसे भी पूर्व में होने वाले सनकादि तथा स्वायम्भुव आदि चौदह मनु- ये मुझमें भाव वाले सब-के-सब मेरे संकल्प से उत्पन्न हुए हैं, जिनकी […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 5

अहिंसा समता तुष्टिस्तपो दानं यशोऽयश: |भवन्ति भावा भूतानां मत्त एव पृथग्विधा: || 5|| ahinsā samatā tuṣhṭis tapo dānaṁ yaśho ’yaśhaḥbhavanti bhāvā bhūtānāṁ matta eva pṛithag-vidhāḥ Audio भावार्थ: तथा अहिंसा, समता, संतोष तप (स्वधर्म के आचरण से इंद्रियादि को तपाकर शुद्ध करने का नाम तप है), दान, कीर्ति और अपकीर्ति- ऐसे ये प्राणियों के नाना प्रकार […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 5

अहिंसा समता तुष्टिस्तपो दानं यशोऽयश: | भवन्ति भावा भूतानां मत्त एव पृथग्विधा: || 5||   ahinsā samatā tuṣhṭis tapo dānaṁ yaśho ’yaśhaḥ bhavanti bhāvā bhūtānāṁ matta eva pṛithag-vidhāḥ Audio भावार्थ: तथा अहिंसा, समता, संतोष तप (स्वधर्म के आचरण से इंद्रियादि को तपाकर शुद्ध करने का नाम तप है), दान, कीर्ति और अपकीर्ति- ऐसे ये प्राणियों […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 4

बुद्धिर्ज्ञानमसम्मोह: क्षमा सत्यं दम: शम: |सुखं दु:खं भवोऽभावो भयं चाभयमेव च || 4|| buddhir jñānam asammohaḥ kṣhamā satyaṁ damaḥ śhamaḥsukhaṁ duḥkhaṁ bhavo ’bhāvo bhayaṁ chābhayameva cha Audio भावार्थ: निश्चय करने की शक्ति, यथार्थ ज्ञान, असम्मूढ़ता, क्षमा, सत्य, इंद्रियों का वश में करना, मन का निग्रह तथा सुख-दुःख, उत्पत्ति-प्रलय और भय-अभय Translation From me alone arise […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 3

यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम् |असम्मूढ: स मर्त्येषु सर्वपापै: प्रमुच्यते || 3|| yo māmajam anādiṁ cha vetti loka-maheśhvaramasammūḍhaḥ sa martyeṣhu sarva-pāpaiḥ pramuchyate Audio भावार्थ: जो मुझको अजन्मा अर्थात्‌ वास्तव में जन्मरहित, अनादि (अनादि उसको कहते हैं जो आदि रहित हो एवं सबका कारण हो) और लोकों का महान्‌ ईश्वर तत्त्व से जानता है, वह मनुष्यों […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 2

न मे विदु: सुरगणा: प्रभवं न महर्षय: |अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वश: || 2|| na me viduḥ sura-gaṇāḥ prabhavaṁ na maharṣhayaḥaham ādir hi devānāṁ maharṣhīṇāṁ cha sarvaśhaḥ Audio भावार्थ: मेरी उत्पत्ति को अर्थात्‌ लीला से प्रकट होने को न देवता लोग जानते हैं और न महर्षिजन ही जानते हैं, क्योंकि मैं सब प्रकार से देवताओं […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 1

श्रीभगवानुवाच |भूय एव महाबाहो शृणु मे परमं वच: |यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया || 1|| śhrī bhagavān uvāchabhūya eva mahā-bāho śhṛiṇu me paramaṁ vachaḥyatte ’haṁ prīyamāṇāya vakṣhyāmi hita-kāmyayā Audio भावार्थ: श्री भगवान्‌ बोले- हे महाबाहो! फिर भी मेरे परम रहस्य और प्रभावयुक्त वचन को सुन, जिसे मैं तुझे अतिशय प्रेम रखने वाले के लिए हित की […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 9, Verse 34

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु |मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायण: || 34|| man-manā bhava mad-bhakto mad-yājī māṁ namaskurumām evaiṣhyasi yuktvaivam ātmānaṁ mat-parāyaṇaḥ Audio भावार्थ: मुझमें मन वाला हो, मेरा भक्त बन, मेरा पूजन करने वाला हो, मुझको प्रणाम कर। इस प्रकार आत्मा को मुझमें नियुक्त करके मेरे परायण होकर तू मुझको ही प्राप्त होगा॥34॥ Translation Always […]