Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 8, Verse 2

अधियज्ञ: कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन |प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभि: || 2|| adhiyajñaḥ kathaṁ ko ’tra dehe ’smin madhusūdanaprayāṇa-kāle cha kathaṁ jñeyo ’si niyatātmabhiḥ Audio भावार्थ: : हे मधुसूदन! यहाँ अधियज्ञ कौन है? और वह इस शरीर में कैसे है? तथा युक्त चित्त वाले पुरुषों द्वारा अंत समय में आप किस प्रकार जानने में आते हैं॥2॥ […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 8, Verse 1

अर्जुन उवाच |किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम |अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते || 1|| arjuna uvāchakiṁ tad brahma kim adhyātmaṁ kiṁ karma puruṣhottamaadhibhūtaṁ cha kiṁ proktam adhidaivaṁ kim uchyate Audio भावार्थ: अर्जुन ने कहा- हे पुरुषोत्तम! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत नाम से क्या कहा गया है और […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 30

साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदु: |प्रयाणकालेऽपि च मां ते विदुर्युक्तचेतस: || 30|| sādhibhūtādhidaivaṁ māṁ sādhiyajñaṁ cha ye viduḥprayāṇa-kāle ’pi cha māṁ te vidur yukta-chetasaḥ Audio भावार्थ: जो पुरुष अधिभूत और अधिदैव सहित तथा अधियज्ञ सहित (सबका आत्मरूप) मुझे अन्तकाल में भी जानते हैं, वे युक्तचित्तवाले पुरुष मुझे जानते हैं अर्थात प्राप्त हो जाते हैं॥30॥ […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 29

जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये |ते ब्रह्म तद्विदु: कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम् || 29|| jarā-maraṇa-mokṣhāya mām āśhritya yatanti yete brahma tadviduḥ kṛitsnam adhyātmaṁ karma chākhilam Audio भावार्थ: जो मेरे शरण होकर जरा और मरण से छूटने के लिए यत्न करते हैं, वे पुरुष उस ब्रह्म को, सम्पूर्ण अध्यात्म को, सम्पूर्ण कर्म को जानते हैं॥29॥ Translation Those who […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 28

येषां त्वन्तगतं पापं जनानां पुण्यकर्मणाम् |ते द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता भजन्ते मां दृढव्रता: || 28|| yeṣhāṁ tvanta-gataṁ pāpaṁ janānāṁ puṇya-karmaṇāmte dvandva-moha-nirmuktā bhajante māṁ dṛiḍha-vratāḥ Audio भावार्थ: परन्तु निष्काम भाव से श्रेष्ठ कर्मों का आचरण करने वाले जिन पुरुषों का पाप नष्ट हो गया है, वे राग-द्वेषजनित द्वन्द्व रूप मोह से मुक्त दृढ़निश्चयी भक्त मुझको सब प्रकार से भजते […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 27

इच्छाद्वेषसमुत्थेन द्वन्द्वमोहेन भारत |सर्वभूतानि सम्मोहं सर्गे यान्ति परन्तप || 27|| ichchhā-dveṣha-samutthena dvandva-mohena bhāratasarva-bhūtāni sammohaṁ sarge yānti parantapa Audio भावार्थ: हे भरतवंशी अर्जुन! संसार में इच्छा और द्वेष से उत्पन्न सुख-दुःखादि द्वंद्वरूप मोह से सम्पूर्ण प्राणी अत्यन्त अज्ञता को प्राप्त हो रहे हैं॥27॥ Translation O descendant of Bharat, the dualities of desire and aversion arise from […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 26

वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन |भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन || 26|| vedāhaṁ samatītāni vartamānāni chārjunabhaviṣhyāṇi cha bhūtāni māṁ tu veda na kaśhchana Audio भावार्थ: हे अर्जुन! पूर्व में व्यतीत हुए और वर्तमान में स्थित तथा आगे होने वाले सब भूतों को मैं जानता हूँ, परन्तु मुझको कोई भी श्रद्धा-भक्तिरहित पुरुष नहीं जानता॥26॥ […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 25

नाहं प्रकाश: सर्वस्य योगमायासमावृत: |मूढोऽयं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम् || 25| nāhaṁ prakāśhaḥ sarvasya yoga-māyā-samāvṛitaḥmūḍho ’yaṁ nābhijānāti loko mām ajam avyayam Audio भावार्थ: अपनी योगमाया से छिपा हुआ मैं सबके प्रत्यक्ष नहीं होता, इसलिए यह अज्ञानी जनसमुदाय मुझ जन्मरहित अविनाशी परमेश्वर को नहीं जानता अर्थात मुझको जन्मने-मरने वाला समझता है॥25 Translation I am not manifest to […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 24

अव्यक्तं व्यक्तिमापन्नं मन्यन्ते मामबुद्धय: |परं भावमजानन्तो ममाव्ययमनुत्तमम् || 24|| avyaktaṁ vyaktim āpannaṁ manyante mām abuddhayaḥparaṁ bhāvam ajānanto mamāvyayam anuttamam Audio भावार्थ: बुद्धिहीन पुरुष मेरे अनुत्तम अविनाशी परम भाव को न जानते हुए मन-इन्द्रियों से परे मुझ सच्चिदानन्दघन परमात्मा को मनुष्य की भाँति जन्मकर व्यक्ति भाव को प्राप्त हुआ मानते हैं॥24॥ Translation The less intelligent think […]

Posted inNews

Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 23

अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भवत्यल्पमेधसाम् |देवान्देवयजो यान्ति मद्भक्ता यान्ति मामपि || 23|| antavat tu phalaṁ teṣhāṁ tad bhavatyalpa-medhasāmdevān deva-yajo yānti mad-bhaktā yānti mām api Audio भावार्थ: : परन्तु उन अल्प बुद्धिवालों का वह फल नाशवान है तथा वे देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं और मेरे भक्त चाहे जैसे ही भजें, अन्त में […]