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Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 38

कच्चिन्नोभयविभ्रष्टश्छिन्नाभ्रमिव नश्यति |अप्रतिष्ठो महाबाहो विमूढो ब्रह्मण: पथि || 38|| kachchin nobhaya-vibhraṣhṭaśh chhinnābhram iva naśhyatiapratiṣhṭho mahā-bāho vimūḍho brahmaṇaḥ pathi Audio भावार्थ: हे महाबाहो! क्या वह भगवत्प्राप्ति के मार्ग में मोहित और आश्रयरहित पुरुष छिन्न-भिन्न बादल की भाँति दोनों ओर से भ्रष्ट होकर नष्ट तो नहीं हो जाता?॥38॥ Translation Does not such a person who deviates from […]

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Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 37

अर्जुन उवाच |अयति: श्रद्धयोपेतो योगाच्चलितमानस: |अप्राप्य योगसंसिद्धिं कां गतिं कृष्ण गच्छति || 37|| arjuna uvāchaayatiḥ śhraddhayopeto yogāch chalita-mānasaḥaprāpya yoga-sansiddhiṁ kāṅ gatiṁ kṛiṣhṇa gachchhati Audio भावार्थ: अर्जुन बोले- हे श्रीकृष्ण! जो योग में श्रद्धा रखने वाला है, किन्तु संयमी नहीं है, इस कारण जिसका मन अन्तकाल में योग से विचलित हो गया है, ऐसा साधक योग […]

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Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 36

असंयतात्मना योगो दुष्प्राप इति मे मति: |वश्यात्मना तु यतता शक्योऽवाप्तुमुपायत: || 36|| asaṅyatātmanā yogo duṣhprāpa iti me matiḥvaśhyātmanā tu yatatā śhakyo ’vāptum upāyataḥ Audio भावार्थ: जिसका मन वश में किया हुआ नहीं है, ऐसे पुरुष द्वारा योग दुष्प्राप्य है और वश में किए हुए मन वाले प्रयत्नशील पुरुष द्वारा साधन से उसका प्राप्त होना सहज […]

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Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 35

श्रीभगवानुवाच |असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम् |अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते || 35|| śhrī bhagavān uvāchaasanśhayaṁ mahā-bāho mano durnigrahaṁ chalamabhyāsena tu kaunteya vairāgyeṇa cha gṛihyate Audio भावार्थ: श्री भगवान बोले- हे महाबाहो! निःसंदेह मन चंचल और कठिनता से वश में होने वाला है। परन्तु हे कुंतीपुत्र अर्जुन! यह अभ्यास (गीता अध्याय 12 श्लोक 9 […]

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Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 34

चञ्चलं हि मन: कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम् |तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम् || 34|| chañchalaṁ hi manaḥ kṛiṣhṇa pramāthi balavad dṛiḍhamtasyāhaṁ nigrahaṁ manye vāyor iva su-duṣhkaram Audio भावार्थ: क्योंकि हे श्रीकृष्ण! यह मन बड़ा चंचल, प्रमथन स्वभाव वाला, बड़ा दृढ़ और बलवान है। इसलिए उसको वश में करना मैं वायु को रोकने की भाँति अत्यन्त दुष्कर […]

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Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 33

अर्जुन उवाच |योऽयं योगस्त्वया प्रोक्त: साम्येन मधुसूदन |एतस्याहं न पश्यामि चञ्चलत्वात्स्थितिं स्थिराम् || 33|| arjuna uvāchayo ’yaṁ yogas tvayā proktaḥ sāmyena madhusūdanaetasyāhaṁ na paśhyāmi chañchalatvāt sthitiṁ sthirām Audio भावार्थ: अर्जुन बोले- हे मधुसूदन! जो यह योग आपने समभाव से कहा है, मन के चंचल होने से मैं इसकी नित्य स्थिति को नहीं देखता हूँ॥33॥ Translation […]

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Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 32

आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योऽर्जुन |सुखं वा यदि वा दु:खं स योगी परमो मत: || 32|| ātmaupamyena sarvatra samaṁ paśhyati yo ’rjunasukhaṁ vā yadi vā duḥkhaṁ sa yogī paramo mataḥ Audio भावार्थ: हे अर्जुन! जो योगी अपनी भाँति (जैसे मनुष्य अपने मस्तक, हाथ, पैर और गुदादि के साथ ब्राह्मण, क्षत्रिय, शूद्र और म्लेच्छादिकों का-सा बर्ताव […]

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Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 31

सर्वभूतस्थितं यो मां भजत्येकत्वमास्थित: |सर्वथा वर्तमानोऽपि स योगी मयि वर्तते || 31|| sarva-bhūta-sthitaṁ yo māṁ bhajatyekatvam āsthitaḥsarvathā vartamāno ’pi sa yogī mayi vartate Audio भावार्थ: जो पुरुष एकीभाव में स्थित होकर सम्पूर्ण भूतों में आत्मरूप से स्थित मुझ सच्चिदानन्दघन वासुदेव को भजता है, वह योगी सब प्रकार से बरतता हुआ भी मुझमें ही बरतता है॥31॥ […]

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Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 30

यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति |तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति || 30|| yo māṁ paśhyati sarvatra sarvaṁ cha mayi paśhyatitasyāhaṁ na praṇaśhyāmi sa cha me na praṇaśhyati Audio भावार्थ: जो पुरुष सम्पूर्ण भूतों में सबके आत्मरूप मुझ वासुदेव को ही व्यापक देखता है और सम्पूर्ण भूतों को मुझ वासुदेव […]

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Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 29

सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि |ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शन: || 29|| sarva-bhūta-stham ātmānaṁ sarva-bhūtāni chātmaniīkṣhate yoga-yuktātmā sarvatra sama-darśhanaḥ Audio भावार्थ: सर्वव्यापी अनंत चेतन में एकीभाव से स्थिति रूप योग से युक्त आत्मा वाला तथा सब में समभाव से देखने वाला योगी आत्मा को सम्पूर्ण भूतों में स्थित और सम्पूर्ण भूतों को आत्मा में कल्पित देखता है॥29॥ Translation […]