एतन्मे संशयं कृष्ण छेत्तुमर्हस्यशेषत: |त्वदन्य: संशयस्यास्य छेत्ता न ह्युपपद्यते || 39|| etan me sanśhayaṁ kṛiṣhṇa chhettum arhasyaśheṣhataḥtvad-anyaḥ sanśhayasyāsya chhettā na hyupapadyate Audio भावार्थ: हे श्रीकृष्ण! मेरे इस संशय को सम्पूर्ण रूप से छेदन करने के लिए आप ही योग्य हैं क्योंकि आपके सिवा दूसरा इस संशय का छेदन करने वाला मिलना संभव नहीं है॥39॥ Translation […]
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Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 38
कच्चिन्नोभयविभ्रष्टश्छिन्नाभ्रमिव नश्यति |अप्रतिष्ठो महाबाहो विमूढो ब्रह्मण: पथि || 38|| kachchin nobhaya-vibhraṣhṭaśh chhinnābhram iva naśhyatiapratiṣhṭho mahā-bāho vimūḍho brahmaṇaḥ pathi Audio भावार्थ: हे महाबाहो! क्या वह भगवत्प्राप्ति के मार्ग में मोहित और आश्रयरहित पुरुष छिन्न-भिन्न बादल की भाँति दोनों ओर से भ्रष्ट होकर नष्ट तो नहीं हो जाता?॥38॥ Translation Does not such a person who deviates from […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 37
अर्जुन उवाच |अयति: श्रद्धयोपेतो योगाच्चलितमानस: |अप्राप्य योगसंसिद्धिं कां गतिं कृष्ण गच्छति || 37|| arjuna uvāchaayatiḥ śhraddhayopeto yogāch chalita-mānasaḥaprāpya yoga-sansiddhiṁ kāṅ gatiṁ kṛiṣhṇa gachchhati Audio भावार्थ: अर्जुन बोले- हे श्रीकृष्ण! जो योग में श्रद्धा रखने वाला है, किन्तु संयमी नहीं है, इस कारण जिसका मन अन्तकाल में योग से विचलित हो गया है, ऐसा साधक योग […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 36
असंयतात्मना योगो दुष्प्राप इति मे मति: |वश्यात्मना तु यतता शक्योऽवाप्तुमुपायत: || 36|| asaṅyatātmanā yogo duṣhprāpa iti me matiḥvaśhyātmanā tu yatatā śhakyo ’vāptum upāyataḥ Audio भावार्थ: जिसका मन वश में किया हुआ नहीं है, ऐसे पुरुष द्वारा योग दुष्प्राप्य है और वश में किए हुए मन वाले प्रयत्नशील पुरुष द्वारा साधन से उसका प्राप्त होना सहज […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 35
श्रीभगवानुवाच |असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम् |अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते || 35|| śhrī bhagavān uvāchaasanśhayaṁ mahā-bāho mano durnigrahaṁ chalamabhyāsena tu kaunteya vairāgyeṇa cha gṛihyate Audio भावार्थ: श्री भगवान बोले- हे महाबाहो! निःसंदेह मन चंचल और कठिनता से वश में होने वाला है। परन्तु हे कुंतीपुत्र अर्जुन! यह अभ्यास (गीता अध्याय 12 श्लोक 9 […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 34
चञ्चलं हि मन: कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम् |तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम् || 34|| chañchalaṁ hi manaḥ kṛiṣhṇa pramāthi balavad dṛiḍhamtasyāhaṁ nigrahaṁ manye vāyor iva su-duṣhkaram Audio भावार्थ: क्योंकि हे श्रीकृष्ण! यह मन बड़ा चंचल, प्रमथन स्वभाव वाला, बड़ा दृढ़ और बलवान है। इसलिए उसको वश में करना मैं वायु को रोकने की भाँति अत्यन्त दुष्कर […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 33
अर्जुन उवाच |योऽयं योगस्त्वया प्रोक्त: साम्येन मधुसूदन |एतस्याहं न पश्यामि चञ्चलत्वात्स्थितिं स्थिराम् || 33|| arjuna uvāchayo ’yaṁ yogas tvayā proktaḥ sāmyena madhusūdanaetasyāhaṁ na paśhyāmi chañchalatvāt sthitiṁ sthirām Audio भावार्थ: अर्जुन बोले- हे मधुसूदन! जो यह योग आपने समभाव से कहा है, मन के चंचल होने से मैं इसकी नित्य स्थिति को नहीं देखता हूँ॥33॥ Translation […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 32
आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योऽर्जुन |सुखं वा यदि वा दु:खं स योगी परमो मत: || 32|| ātmaupamyena sarvatra samaṁ paśhyati yo ’rjunasukhaṁ vā yadi vā duḥkhaṁ sa yogī paramo mataḥ Audio भावार्थ: हे अर्जुन! जो योगी अपनी भाँति (जैसे मनुष्य अपने मस्तक, हाथ, पैर और गुदादि के साथ ब्राह्मण, क्षत्रिय, शूद्र और म्लेच्छादिकों का-सा बर्ताव […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 31
सर्वभूतस्थितं यो मां भजत्येकत्वमास्थित: |सर्वथा वर्तमानोऽपि स योगी मयि वर्तते || 31|| sarva-bhūta-sthitaṁ yo māṁ bhajatyekatvam āsthitaḥsarvathā vartamāno ’pi sa yogī mayi vartate Audio भावार्थ: जो पुरुष एकीभाव में स्थित होकर सम्पूर्ण भूतों में आत्मरूप से स्थित मुझ सच्चिदानन्दघन वासुदेव को भजता है, वह योगी सब प्रकार से बरतता हुआ भी मुझमें ही बरतता है॥31॥ […]
Bhagavad Gita: Chapter 6, Verse 30
यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति |तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति || 30|| yo māṁ paśhyati sarvatra sarvaṁ cha mayi paśhyatitasyāhaṁ na praṇaśhyāmi sa cha me na praṇaśhyati Audio भावार्थ: जो पुरुष सम्पूर्ण भूतों में सबके आत्मरूप मुझ वासुदेव को ही व्यापक देखता है और सम्पूर्ण भूतों को मुझ वासुदेव […]
