Bhagavad Gita: Chapter 4, Verse 10 is a powerful and meaningful verse that has touched the lives of millions of people around the world. This verse is a part of the Bhagavad Gita, one of the most significant and revered texts in Hinduism. The Bhagavad Gita is a dialogue between Lord Krishna and his disciple […]
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Bhagavad Gita: Chapter 4, Verse 9
जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वत: |त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन || 9|| janma karma cha me divyam evaṁ yo vetti tattvataḥtyaktvā dehaṁ punar janma naiti mām eti so ’rjuna Audio भावार्थ: हे अर्जुन! मेरे जन्म और कर्म दिव्य अर्थात निर्मल और अलौकिक हैं- इस प्रकार जो मनुष्य तत्व से (सर्वशक्तिमान, सच्चिदानन्दन […]
Bhagavad Gita: Chapter 4, Verse 8
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् |धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे || 8|| paritrāṇāya sādhūnāṁ vināśhāya cha duṣhkṛitāmdharma-sansthāpanārthāya sambhavāmi yuge yuge Audio भावार्थ: : साधु पुरुषों का उद्धार करने के लिए, पाप कर्म करने वालों का विनाश करने के लिए और धर्म की अच्छी तरह से स्थापना करने के लिए मैं युग-युग में प्रकट हुआ करता हूँ॥8॥ […]
Bhagavad Gita: Chapter 4, Verse 7
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत |अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् || 7|| yadā yadā hi dharmasya glānir bhavati bhārataabhyutthānam adharmasya tadātmānaṁ sṛijāmyaham Audio भावार्थ: हे भारत! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब ही मैं अपने रूप को रचता हूँ अर्थात साकार रूप से लोगों के सम्मुख प्रकट होता हूँ॥7॥ Translation Whenever […]
Bhagavad Gita: Chapter 4, Verse 6
अजोऽपि सन्नव्ययात्मा भूतानामीश्वरोऽपि सन् |प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय सम्भवाम्यात्ममायया || 6|| ajo ’pi sannavyayātmā bhūtānām īśhvaro ’pi sanprakṛitiṁ svām adhiṣhṭhāya sambhavāmyātma-māyayā Audio भावार्थ: मैं अजन्मा और अविनाशीस्वरूप होते हुए भी तथा समस्त प्राणियों का ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृति को अधीन करके अपनी योगमाया से प्रकट होता हूँ॥6॥ Translation Although I am unborn, the Lord of […]
Bhagavad Gita: Chapter 4, Verse 5
श्रीभगवानुवाच |बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन |तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परन्तप || 5|| śhrī bhagavān uvāchabahūni me vyatītāni janmāni tava chārjunatānyahaṁ veda sarvāṇi na tvaṁ vettha parantapa Audio भावार्थ: श्री भगवान बोले- हे परंतप अर्जुन! मेरे और तेरे बहुत से जन्म हो चुके हैं। उन सबको तू नहीं जानता, किन्तु मैं जानता […]
Bhagavad Gita: Chapter 4, Verse 4
अर्जुन उवाच |अपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वत: |कथमेतद्विजानीयां त्वमादौ प्रोक्तवानिति || 4|| arjuna uvāchaaparaṁ bhavato janma paraṁ janma vivasvataḥkatham etad vijānīyāṁ tvam ādau proktavān iti Audio भावार्थ: अर्जुन बोले- आपका जन्म तो अर्वाचीन-अभी हाल का है और सूर्य का जन्म बहुत पुराना है अर्थात कल्प के आदि में हो चुका था। तब मैं इस […]
Bhagavad Gita: Chapter 4, Verse 3
स एवायं मया तेऽद्य योग: प्रोक्त: पुरातन: |भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम् || 3|| sa evāyaṁ mayā te ’dya yogaḥ proktaḥ purātanaḥbhakto ’si me sakhā cheti rahasyaṁ hyetad uttamam Audio भावार्थ: तू मेरा भक्त और प्रिय सखा है, इसलिए वही यह पुरातन योग आज मैंने तुझको कहा है क्योंकि यह बड़ा ही उत्तम रहस्य […]
Bhagavad Gita: Chapter 4, Verse 2
एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदु: |स कालेनेह महता योगो नष्ट: परन्तप || 2|| evaṁ paramparā-prāptam imaṁ rājarṣhayo viduḥsa kāleneha mahatā yogo naṣhṭaḥ parantapa Audio भावार्थ: हे परन्तप अर्जुन! इस प्रकार परम्परा से प्राप्त इस योग को राजर्षियों ने जाना, किन्तु उसके बाद वह योग बहुत काल से इस पृथ्वी लोक में लुप्तप्राय हो गया॥2॥ Translation O […]
Bhagavad Gita: Chapter 4, Verse 1
श्रीभगवानुवाच |इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम् |विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत् || 1|| śhrī bhagavān uvāchaimaṁ vivasvate yogaṁ proktavān aham avyayamvivasvān manave prāha manur ikṣhvākave ’bravīt Audio भावार्थ: श्री भगवान बोले- मैंने इस अविनाशी योग को सूर्य से कहा था, सूर्य ने अपने पुत्र वैवस्वत मनु से कहा और मनु ने अपने पुत्र राजा इक्ष्वाकु से कहा॥1॥ Translation […]
