ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसा: |
जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसा: || 18||

ūrdhvaṁ gachchhanti sattva-sthā madhye tiṣhṭhanti rājasāḥ
jaghanya-guṇa-vṛitti-sthā adho gachchhanti tāmasāḥ

Audio

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भावार्थ:

सत्त्वगुण में स्थित पुरुष स्वर्गादि उच्च लोकों को जाते हैं, रजोगुण में स्थित राजस पुरुष मध्य में अर्थात मनुष्य लोक में ही रहते हैं और तमोगुण के कार्यरूप निद्रा, प्रमाद और आलस्यादि में स्थित तामस पुरुष अधोगति को अर्थात कीट, पशु आदि नीच योनियों को तथा नरकों को प्राप्त होते हैं॥18॥

Translation

Those situated in the mode of goodness rise upward; those in the mode of passion stay in the middle; and those in the mode of ignorance go downward.

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English Translation Of Sri Shankaracharya’s Sanskrit Commentary By Swami Gambirananda

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