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Bhagavad Gita: Chapter 16, Verse 1

श्रीभगवानुवाच |अभयं सत्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थिति: |दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम् || 1|| śhrī-bhagavān uvāchaabhayaṁ sattva-sanśhuddhir jñāna-yoga-vyavasthitiḥdānaṁ damaśh cha yajñaśh cha svādhyāyas tapa ārjavam Audio भावार्थ: श्री भगवान बोले- भय का सर्वथा अभाव, अन्तःकरण की पूर्ण निर्मलता, तत्त्वज्ञान के लिए ध्यान योग में निरन्तर दृढ़ स्थिति (परमात्मा के स्वरूप को तत्त्व से जानने के लिए सच्चिदानन्दघन परमात्मा के […]

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Bhagavad Gita: Chapter 15, Verse 20

इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं मयानघ |एतद्बुद्ध्वा बुद्धिमान्स्यात्कृतकृत्यश्च भारत || 20|| iti guhyatamaṁ śhāstram idam uktaṁ mayānaghaetad buddhvā buddhimān syāt kṛita-kṛityaśh cha bhārata Audio भावार्थ: हे निष्पाप अर्जुन! इस प्रकार यह अति रहस्ययुक्त गोपनीय शास्त्र मेरे द्वारा कहा गया, इसको तत्त्व से जानकर मनुष्य ज्ञानवान और कृतार्थ हो जाता है॥20॥ Translation I have shared this most secret […]

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Bhagavad Gita: Chapter 15, Verse 19

यो मामेवमसम्मूढो जानाति पुरुषोत्तमम् |स सर्वविद्भजति मां सर्वभावेन भारत || 19|| yo mām evam asammūḍho jānāti puruṣhottamamsa sarva-vid bhajati māṁ sarva-bhāvena bhārata Audio भावार्थ: भारत! जो ज्ञानी पुरुष मुझको इस प्रकार तत्त्व से पुरुषोत्तम जानता है, वह सर्वज्ञ पुरुष सब प्रकार से निरन्तर मुझ वासुदेव परमेश्वर को ही भजता है॥19॥ Translation Those who know Me […]

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Bhagavad Gita: Chapter 15, Verse 18

यस्मात्क्षरमतीतोऽहमक्षरादपि चोत्तम: |अतोऽस्मि लोके वेदे च प्रथित: पुरुषोत्तम: || 18| yasmāt kṣharam atīto ’ham akṣharād api chottamaḥato ’smi loke vede cha prathitaḥ puruṣhottamaḥ Audio भावार्थ: क्योंकि मैं नाशवान जड़वर्ग- क्षेत्र से तो सर्वथा अतीत हूँ और अविनाशी जीवात्मा से भी उत्तम हूँ, इसलिए लोक में और वेद में भी पुरुषोत्तम नाम से प्रसिद्ध हूँ॥18॥ Translation […]

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Bhagavad Gita: Chapter 15, Verse 17

उत्तम: पुरुषस्त्वन्य: परमात्मेत्युदाहृत: |यो लोकत्रयमाविश्य बिभर्त्यव्यय ईश्वर: || 17|| uttamaḥ puruṣhas tv anyaḥ paramātmety udāhṛitaḥyo loka-trayam āviśhya bibharty avyaya īśhvaraḥ Audio भावार्थ: इन दोनों से उत्तम पुरुष तो अन्य ही है, जो तीनों लोकों में प्रवेश करके सबका धारण-पोषण करता है एवं अविनाशी परमेश्वर और परमात्मा- इस प्रकार कहा गया है॥17॥ Translation Besides these, is […]

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Bhagavad Gita: Chapter 15, Verse 16

द्वाविमौ पुरुषौ लोके क्षरश्चाक्षर एव च |क्षर: सर्वाणि भूतानि कूटस्थोऽक्षर उच्यते || 16||/h2> dvāv imau puruṣhau loke kṣharaśh chākṣhara eva chakṣharaḥ sarvāṇi bhūtāni kūṭa-stho ’kṣhara uchyate Audio भावार्थ: इस संसार में नाशवान और अविनाशी भी ये दो प्रकार (गीता अध्याय 7 श्लोक 4-5 में जो अपरा और परा प्रकृति के नाम से कहे गए हैं […]

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Bhagavad Gita: Chapter 15, Verse 15

सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टोमत्त: स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च |वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्योवेदान्तकृद्वेदविदेव चाहम् || 15|| sarvasya chāhaṁ hṛidi sanniviṣhṭomattaḥ smṛitir jñānam apohanaṁ chavedaiśh cha sarvair aham eva vedyovedānta-kṛid veda-vid eva chāham Audio भावार्थ: मैं ही सब प्राणियों के हृदय में अन्तर्यामी रूप से स्थित हूँ तथा मुझसे ही स्मृति, ज्ञान और अपोहन (विचार द्वारा बुद्धि में रहने वाले […]

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Bhagavad Gita: Chapter 15, Verse 14

अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रित: |प्राणापानसमायुक्त: पचाम्यन्नं चतुर्विधम् || 14|| ahaṁ vaiśhvānaro bhūtvā prāṇināṁ deham āśhritaḥprāṇāpāna-samāyuktaḥ pachāmy annaṁ chatur-vidham Audio भावार्थ: ही सब प्राणियों के शरीर में स्थित रहने वाला प्राण और अपान से संयुक्त वैश्वानर अग्नि रूप होकर चार (भक्ष्य, भोज्य, लेह्य और चोष्य, ऐसे चार प्रकार के अन्न होते हैं, उनमें जो चबाकर […]

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Bhagavad Gita: Chapter 15, Verse 13

गामाविश्य च भूतानि धारयाम्यहमोजसा |पुष्णामि चौषधी: सर्वा: सोमो भूत्वा रसात्मक: || 13||} gām āviśhya cha bhūtāni dhārayāmy aham ojasāpuṣhṇāmi chauṣhadhīḥ sarvāḥ somo bhūtvā rasātmakaḥ Audio भावार्थ: और मैं ही पृथ्वी में प्रवेश करके अपनी शक्ति से सब भूतों को धारण करता हूँ और रसस्वरूप अर्थात अमृतमय चन्द्रमा होकर सम्पूर्ण ओषधियों को अर्थात वनस्पतियों को पुष्ट […]

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Bhagavad Gita: Chapter 15, Verse 12

यदादित्यगतं तेजो जगद्भासयतेऽखिलम् |यच्चन्द्रमसि यच्चाग्नौ तत्तेजो विद्धि मामकम् || 12|| yad āditya-gataṁ tejo jagad bhāsayate ’khilamyach chandramasi yach chāgnau tat tejo viddhi māmakam Audio भावार्थ: सूर्य में स्थित जो तेज सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करता है तथा जो तेज चन्द्रमा में है और जो अग्नि में है- उसको तू मेरा ही तेज जान॥12॥ Translation Know […]