ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसा: |जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसा: || 18|| ūrdhvaṁ gachchhanti sattva-sthā madhye tiṣhṭhanti rājasāḥjaghanya-guṇa-vṛitti-sthā adho gachchhanti tāmasāḥ Audio भावार्थ: सत्त्वगुण में स्थित पुरुष स्वर्गादि उच्च लोकों को जाते हैं, रजोगुण में स्थित राजस पुरुष मध्य में अर्थात मनुष्य लोक में ही रहते हैं और तमोगुण के कार्यरूप निद्रा, प्रमाद और आलस्यादि […]
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Bhagavad Gita: Chapter 14, Verse 17
सत्वात्सञ्जायते ज्ञानं रजसो लोभ एव च |प्रमादमोहौ तमसो भवतोऽज्ञानमेव च || 17|| sattvāt sañjāyate jñānaṁ rajaso lobha eva chapramāda-mohau tamaso bhavato ’jñānam eva cha Audio भावार्थ: सत्त्वगुण से ज्ञान उत्पन्न होता है और रजोगुण से निःसन्देह लोभ तथा तमोगुण से प्रमाद (इसी अध्याय के श्लोक 13 में देखना चाहिए) और मोह (इसी अध्याय के श्लोक […]
Bhagavad Gita: Chapter 14, Verse 16
कर्मण: सुकृतस्याहु: सात्विकं निर्मलं फलम् |रजसस्तु फलं दु:खमज्ञानं तमस: फलम् || 16|| karmaṇaḥ sukṛitasyāhuḥ sāttvikaṁ nirmalaṁ phalamrajasas tu phalaṁ duḥkham ajñānaṁ tamasaḥ phalam Audio भावार्थ: ष्ठ कर्म का तो सात्त्विक अर्थात् सुख, ज्ञान और वैराग्यादि निर्मल फल कहा है, राजस कर्म का फल दुःख एवं तामस कर्म का फल अज्ञान कहा है॥16॥ Translation It is […]
Bhagavad Gita: Chapter 14, Verse 15
रजसि प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिषु जायते |तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते || 15|| rajasi pralayaṁ gatvā karma-saṅgiṣhu jāyatetathā pralīnas tamasi mūḍha-yoniṣhu jāyate Audio भावार्थ: रजोगुण के बढ़ने पर मृत्यु को प्राप्त होकर कर्मों की आसक्ति वाले मनुष्यों में उत्पन्न होता है तथा तमोगुण के बढ़ने पर मरा हुआ मनुष्य कीट, पशु आदि मूढ़योनियों में उत्पन्न होता है॥15॥ […]
Bhagavad Gita: Chapter 14, Verse 14
यदा सत्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत् |तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते || 14|| yadā sattve pravṛiddhe tu pralayaṁ yāti deha-bhṛittadottama-vidāṁ lokān amalān pratipadyate Audio भावार्थ: जब यह मनुष्य सत्त्वगुण की वृद्धि में मृत्यु को प्राप्त होता है, तब तो उत्तम कर्म करने वालों के निर्मल दिव्य स्वर्गादि लोकों को प्राप्त होता है॥14॥ Translation Those who die with […]
Bhagavad Gita: Chapter 14, Verse 13
अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च |तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन || 13|| aprakāśho ’pravṛittiśh cha pramādo moha eva chatamasy etāni jāyante vivṛiddhe kuru-nandana Audio भावार्थ: हे अर्जुन! तमोगुण के बढ़ने पर अन्तःकरण और इंन्द्रियों में अप्रकाश, कर्तव्य-कर्मों में अप्रवृत्ति और प्रमाद अर्थात व्यर्थ चेष्टा और निद्रादि अन्तःकरण की मोहिनी वृत्तियाँ – ये सब ही उत्पन्न होते […]
Bhagavad Gita: Chapter 14, Verse 12
लोभ: प्रवृत्तिरारम्भ: कर्मणामशम: स्पृहा |रजस्येतानि जायन्ते विवृद्धे भरतर्षभ || 12|| lobhaḥ pravṛittir ārambhaḥ karmaṇām aśhamaḥ spṛihārajasy etāni jāyante vivṛiddhe bharatarṣhabha Audio भावार्थ: हे अर्जुन! रजोगुण के बढ़ने पर लोभ, प्रवृत्ति, स्वार्थबुद्धि से कर्मों का सकामभाव से आरम्भ, अशान्ति और विषय भोगों की लालसा- ये सब उत्पन्न होते हैं॥12॥ Translation O Arjun, the symptoms of greed, […]
Bhagavad Gita: Chapter 14, Verse 11
सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाश उपजायते |ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्वमित्युत || 11|| sarva-dvāreṣhu dehe ’smin prakāśha upajāyatejñānaṁ yadā tadā vidyād vivṛiddhaṁ sattvam ity uta Audio भावार्थ: जिस समय इस देह में तथा अन्तःकरण और इन्द्रियों में चेतनता और विवेक शक्ति उत्पन्न होती है, उस समय ऐसा जानना चाहिए कि सत्त्वगुण बढ़ा है॥11॥ Translation BG 14.11-13: When all […]
Bhagavad Gita: Chapter 14, Verse 10
रजस्तमश्चाभिभूय सत्वं भवति भारत |रज: सत्वं तमश्चैव तम: सत्वं रजस्तथा || 10|| rajas tamaśh chābhibhūya sattvaṁ bhavati bhāratarajaḥ sattvaṁ tamaśh chaiva tamaḥ sattvaṁ rajas tathā Audio भावार्थ: हे अर्जुन! रजोगुण और तमोगुण को दबाकर सत्त्वगुण, सत्त्वगुण और तमोगुण को दबाकर रजोगुण, वैसे ही सत्त्वगुण और रजोगुण को दबाकर तमोगुण होता है अर्थात बढ़ता है॥10॥ Translation […]
Bhagavad Gita: Chapter 14, Verse 9
सत्वं सुखे सञ्जयति रज: कर्मणि भारत |ज्ञानमावृत्य तु तम: प्रमादे सञ्जयत्युत || 9|| sattvaṁ sukhe sañjayati rajaḥ karmaṇi bhāratajñānam āvṛitya tu tamaḥ pramāde sañjayaty uta Audio भावार्थ: हे अर्जुन! सत्त्वगुण सुख में लगाता है और रजोगुण कर्म में तथा तमोगुण तो ज्ञान को ढँककर प्रमाद में भी लगाता है॥9॥ Translation Sattva binds one to material […]
