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Bhagavad Gita: Chapter 9, Verse 33

किं पुनर्ब्राह्मणा: पुण्या भक्ता राजर्षयस्तथा |अनित्यमसुखं लोकमिमं प्राप्य भजस्व माम् || 33|| kiṁ punar brāhmaṇāḥ puṇyā bhaktā rājarṣhayas tathāanityam asukhaṁ lokam imaṁ prāpya bhajasva mām Audio भावार्थ: फिर इसमें कहना ही क्या है, जो पुण्यशील ब्राह्मण था राजर्षि भक्तजन मेरी शरण होकर परम गति को प्राप्त होते हैं। इसलिए तू सुखरहित और क्षणभंगुर इस मनुष्य […]

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Bhagavad Gita: Chapter 9, Verse 32

मां हि पार्थ व्यपाश्रित्य येऽपि स्यु: पापयोनय: |स्त्रियो वैश्यास्तथा शूद्रास्तेऽपि यान्ति परां गतिम् || 32|| māṁ hi pārtha vyapāśhritya ye ’pi syuḥ pāpa-yonayaḥstriyo vaiśhyās tathā śhūdrās te ’pi yānti parāṁ gatim Audio भावार्थ: हे अर्जुन! स्त्री, वैश्य, शूद्र तथा पापयोनि चाण्डालादि जो कोई भी हों, वे भी मेरे शरण होकर परमगति को ही प्राप्त होते […]

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Bhagavad Gita: Chapter 9, Verse 31

क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति |कौन्तेय प्रतिजानीहि न मे भक्त: प्रणश्यति || 31|| kṣhipraṁ bhavati dharmātmā śhaśhvach-chhāntiṁ nigachchhatikaunteya pratijānīhi na me bhaktaḥ praṇaśhyati Audio भावार्थ: : वह शीघ्र ही धर्मात्मा हो जाता है और सदा रहने वाली परम शान्ति को प्राप्त होता है। हे अर्जुन! तू निश्चयपूर्वक सत्य जान कि मेरा भक्त नष्ट नहीं होता॥31॥ […]

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Bhagavad Gita: Chapter 9, Verse 30

अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक् |साधुरेव स मन्तव्य: सम्यग्व्यवसितो हि स: || 30|| api chet su-durāchāro bhajate mām ananya-bhāksādhur eva sa mantavyaḥ samyag vyavasito hi saḥ Audio भावार्थ: यदि कोई अतिशय दुराचारी भी अनन्य भाव से मेरा भक्त होकर मुझको भजता है तो वह साधु ही मानने योग्य है, क्योंकि वह यथार्थ निश्चय वाला है। अर्थात्‌ […]

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Bhagavad Gita: Chapter 9, Verse 29

समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रिय: |ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम् || 29|| samo ’haṁ sarva-bhūteṣhu na me dveṣhyo ’sti na priyaḥye bhajanti tu māṁ bhaktyā mayi te teṣhu chāpyaham Audio भावार्थ: यदि कोई अतिशय दुराचारी भी अनन्य भाव से मेरा भक्त होकर मुझको भजता है तो वह साधु ही […]

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Bhagavad Gita: Chapter 9, Verse 28

शुभाशुभफलैरेवं मोक्ष्यसे कर्मबन्धनै: |संन्यासयोगयुक्तात्मा विमुक्तो मामुपैष्यसि || 28|| śhubhāśhubha-phalair evaṁ mokṣhyase karma-bandhanaiḥsannyāsa-yoga-yuktātmā vimukto mām upaiṣhyasi Audio भावार्थ: इस प्रकार, जिसमें समस्त कर्म मुझ भगवान के अर्पण होते हैं- ऐसे संन्यासयोग से युक्त चित्तवाला तू शुभाशुभ फलरूप कर्मबंधन से मुक्त हो जाएगा और उनसे मुक्त होकर मुझको ही प्राप्त होगा। ॥28॥ Translation By dedicating all your […]

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Bhagavad Gita: Chapter 9, Verse 27

यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत् |यत्तपस्यसि कौन्तेय तत्कुरुष्व मदर्पणम् || 27|| yat karoṣhi yad aśhnāsi yaj juhoṣhi dadāsi yatyat tapasyasi kaunteya tat kuruṣhva mad-arpaṇam Audio भावार्थ: हे अर्जुन! तू जो कर्म करता है, जो खाता है, जो हवन करता है, जो दान देता है और जो तप करता है, वह सब मेरे अर्पण कर॥27॥ Translation […]

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Bhagavad Gita: Chapter 9, Verse 26

पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति |तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मन: || 26|| patraṁ puṣhpaṁ phalaṁ toyaṁ yo me bhaktyā prayachchhatitadahaṁ bhaktyupahṛitam aśhnāmi prayatātmanaḥ Audio भावार्थ: जो कोई भक्त मेरे लिए प्रेम से पत्र, पुष्प, फल, जल आदि अर्पण करता है, उस शुद्धबुद्धि निष्काम प्रेमी भक्त का प्रेमपूर्वक अर्पण किया हुआ वह पत्र-पुष्पादि मैं सगुणरूप […]

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Bhagavad Gita: Chapter 9, Verse 25

यान्ति देवव्रता देवान्पितॄ न्यान्ति पितृव्रता: |भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम् ||25|| yānti deva-vratā devān pitṝīn yānti pitṛi-vratāḥbhūtāni yānti bhūtejyā yānti mad-yājino ’pi mām Audio भावार्थ: देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं, पितरों को पूजने वाले पितरों को प्राप्त होते हैं, भूतों को पूजने वाले भूतों को प्राप्त होते हैं और मेरा […]

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Bhagavad Gita: Chapter 9, Verse 24

अहं हि सर्वयज्ञानां भोक्ता च प्रभुरेव च |न तु मामभिजानन्ति तत्वेनातश्च्यवन्ति ते || 24|| ahaṁ hi sarva-yajñānāṁ bhoktā cha prabhureva chana tu mām abhijānanti tattvenātaśh chyavanti te Audio भावार्थ: क्योंकि संपूर्ण यज्ञों का भोक्ता और स्वामी भी मैं ही हूँ, परंतु वे मुझ परमेश्वर को तत्त्व से नहीं जानते, इसी से गिरते हैं अर्थात्‌ पुनर्जन्म […]