ये चैव सात्विका भावा राजसास्तामसाश्च ये |मत्त एवेति तान्विद्धि न त्वहं तेषु ते मयि || 12|| ye chaiva sāttvikā bhāvā rājasās tāmasāśh cha yematta eveti tān viddhi na tvahaṁ teṣhu te mayi Audio भावार्थ: और भी जो सत्त्व गुण से उत्पन्न होने वाले भाव हैं और जो रजो गुण से होने वाले भाव हैं, उन […]
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Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 11
बलं बलवतां चाहं कामरागविवर्जितम् |धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोऽस्मि भरतर्षभ || 11|| balaṁ balavatāṁ chāhaṁ kāma-rāga-vivarjitamdharmāviruddho bhūteṣhu kāmo ’smi bharatarṣhabha Audio भावार्थ: हे भरतश्रेष्ठ! मैं बलवानों का आसक्ति और कामनाओं से रहित बल अर्थात सामर्थ्य हूँ और सब भूतों में धर्म के अनुकूल अर्थात शास्त्र के अनुकूल काम हूँ॥11॥ Translation O best of the Bharatas, in strong […]
Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 10
बीजं मां सर्वभूतानां विद्धि पार्थ सनातनम् |बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् || 10|| bījaṁ māṁ sarva-bhūtānāṁ viddhi pārtha sanātanambuddhir buddhimatām asmi tejas tejasvinām aham Audio भावार्थ: हे अर्जुन! तू सम्पूर्ण भूतों का सनातन बीज मुझको ही जान। मैं बुद्धिमानों की बुद्धि और तेजस्वियों का तेज हूँ॥10॥ Translation O Arjun, know that I am the eternal seed of all […]
Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 9
पुण्यो गन्ध: पृथिव्यां च तेजश्चास्मि विभावसौ |जीवनं सर्वभूतेषु तपश्चास्मि तपस्विषु || 9|| puṇyo gandhaḥ pṛithivyāṁ cha tejaśh chāsmi vibhāvasaujīvanaṁ sarva-bhūteṣhu tapaśh chāsmi tapasviṣhu Audio भावार्थ: मैं पृथ्वी में पवित्र (शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध से इस प्रसंग में इनके कारण रूप तन्मात्राओं का ग्रहण है, इस बात को स्पष्ट करने के लिए उनके साथ पवित्र […]
Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 8
रसोऽहमप्सु कौन्तेय प्रभास्मि शशिसूर्ययो: |प्रणव: सर्ववेदेषु शब्द: खे पौरुषं नृषु || 8|| raso ’ham apsu kaunteya prabhāsmi śhaśhi-sūryayoḥpraṇavaḥ sarva-vedeṣhu śhabdaḥ khe pauruṣhaṁ nṛiṣhu Audio भावार्थ: हे धनंजय! मुझसे भिन्न दूसरा कोई भी परम कारण नहीं है। यह सम्पूर्ण जगत सूत्र में सूत्र के मणियों के सदृश मुझमें गुँथा हुआ है॥7॥ Translation I am the taste […]
Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 7
मत्त: परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय |मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव || 7|| mattaḥ parataraṁ nānyat kiñchid asti dhanañjayamayi sarvam idaṁ protaṁ sūtre maṇi-gaṇā iva Audio भावार्थ: हे धनंजय! मुझसे भिन्न दूसरा कोई भी परम कारण नहीं है। यह सम्पूर्ण जगत सूत्र में सूत्र के मणियों के सदृश मुझमें गुँथा हुआ है॥7॥ Translation There is nothing […]
Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 6
एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय |अहं कृत्स्नस्य जगत: प्रभव: प्रलयस्तथा || 6|| etad-yonīni bhūtāni sarvāṇītyupadhārayaahaṁ kṛitsnasya jagataḥ prabhavaḥ pralayas tathā Audio भावार्थ: हे अर्जुन! तू ऐसा समझ कि सम्पूर्ण भूत इन दोनों प्रकृतियों से ही उत्पन्न होने वाले हैं और मैं सम्पूर्ण जगत का प्रभव तथा प्रलय हूँ अर्थात् सम्पूर्ण जगत का मूल कारण हूँ॥6॥ Translation Know […]
Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 5
अपरेयमितस्त्वन्यां प्रकृतिं विद्धि मे पराम् |जीवभूतां महाबाहो ययेदं धार्यते जगत् || 5|| apareyam itas tvanyāṁ prakṛitiṁ viddhi me parāmjīva-bhūtāṁ mahā-bāho yayedaṁ dhāryate jagat Audio भावार्थ: यह आठ प्रकार के भेदों वाली तो अपरा अर्थात मेरी जड़ प्रकृति है और हे महाबाहो! इससे दूसरी को, जिससे यह सम्पूर्ण जगत धारण किया जाता है, मेरी जीवरूपा परा […]
Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 4
भूमिरापोऽनलो वायु: खं मनो बुद्धिरेव च |अहङ्कार इतीयं मे भिन्ना प्रकृतिरष्टधा || 4|| bhūmir-āpo ’nalo vāyuḥ khaṁ mano buddhir eva chaahankāra itīyaṁ me bhinnā prakṛitir aṣhṭadhā Audio भावार्थ: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार भी- इस प्रकार ये आठ प्रकार से विभाजित मेरी प्रकृति है। Translation Earth, water, fire, air, space, mind, […]
Bhagavad Gita: Chapter 7, Verse 3
मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये |यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्वत: || 3|| manuṣhyāṇāṁ sahasreṣhu kaśhchid yatati siddhayeyatatām api siddhānāṁ kaśhchin māṁ vetti tattvataḥ Audio भावार्थ: हजारों मनुष्यों में कोई एक मेरी प्राप्ति के लिए यत्न करता है और उन यत्न करने वाले योगियों में भी कोई एक मेरे परायण होकर मुझको तत्व से अर्थात यथार्थ रूप […]
