यच्चापि सर्वभूतानां बीजं तदहमर्जुन |न तदस्ति विना यत्स्यान्मया भूतं चराचरम् || 39| yach chāpi sarva-bhūtānāṁ bījaṁ tad aham arjunana tad asti vinā yat syān mayā bhūtaṁ charācharam Audio भावार्थ: और हे अर्जुन! जो सब भूतों की उत्पत्ति का कारण है, वह भी मैं ही हूँ, क्योंकि ऐसा चर और अचर कोई भी भूत नहीं है, […]
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Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 38
दण्डो दमयतामस्मि नीतिरस्मि जिगीषताम् |मौनं चैवास्मि गुह्यानां ज्ञानं ज्ञानवतामहम् || 38|| daṇḍo damayatām asmi nītir asmi jigīṣhatāmmaunaṁ chaivāsmi guhyānāṁ jñānaṁ jñānavatām aham Audio भावार्थ: मैं दमन करने वालों का दंड अर्थात् दमन करने की शक्ति हूँ, जीतने की इच्छावालों की नीति हूँ, गुप्त रखने योग्य भावों का रक्षक मौन हूँ और ज्ञानवानों का तत्त्वज्ञान मैं […]
Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 37
वृष्णीनां वासुदेवोऽस्मि पाण्डवानां धनञ्जय: |मुनीनामप्यहं व्यास: कवीनामुशना कवि: || 37|| vṛiṣhṇīnāṁ vāsudevo ’smi pāṇḍavānāṁ dhanañjayaḥmunīnām apyahaṁ vyāsaḥ kavīnām uśhanā kaviḥ Audio भावार्थ: वृष्णिवंशियों में (यादवों के अंतर्गत एक वृष्णि वंश भी था) वासुदेव अर्थात् मैं स्वयं तेरा सखा, पाण्डवों में धनञ्जय अर्थात् तू, मुनियों में वेदव्यास और कवियों में शुक्राचार्य कवि भी मैं ही हूँ॥37॥ […]
Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 36
द्यूतं छलयतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् |जयोऽस्मि व्यवसायोऽस्मि सत्वं सत्ववतामहम् || 36|| dyūtaṁ chhalayatām asmi tejas tejasvinām ahamjayo ’smi vyavasāyo ’smi sattvaṁ sattvavatām aham Audio भावार्थ: मैं छल करने वालों में जूआ और प्रभावशाली पुरुषों का प्रभाव हूँ। मैं जीतने वालों का विजय हूँ, निश्चय करने वालों का निश्चय और सात्त्विक पुरुषों का सात्त्विक भाव हूँ॥36॥ Translation I […]
Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 35
बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् |मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकर: || 35|| bṛihat-sāma tathā sāmnāṁ gāyatrī chhandasām ahammāsānāṁ mārga-śhīrṣho ’ham ṛitūnāṁ kusumākaraḥ Audio भावार्थ: तथा गायन करने योग्य श्रुतियों में मैं बृहत्साम और छंदों में गायत्री छंद हूँ तथा महीनों में मार्गशीर्ष और ऋतुओं में वसंत मैं हूँ॥35॥ Translation Amongst the hymns in the Sāma Veda know […]
Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 34
मृत्यु: सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च भविष्यताम् |कीर्ति: श्रीर्वाक्च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृति: क्षमा || 34|| mṛityuḥ sarva-haraśh chāham udbhavaśh cha bhaviṣhyatāmkīrtiḥ śhrīr vāk cha nārīṇāṁ smṛitir medhā dhṛitiḥ kṣhamā Audio भावार्थ: मैं सबका नाश करने वाला मृत्यु और उत्पन्न होने वालों का उत्पत्ति हेतु हूँ तथा स्त्रियों में कीर्ति (कीर्ति आदि ये सात देवताओं की स्त्रियाँ और स्त्रीवाचक नाम […]
Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 33
अक्षराणामकारोऽस्मि द्वन्द्व: सामासिकस्य च |अहमेवाक्षय: कालो धाताहं विश्वतोमुख: || 33|| akṣharāṇām a-kāro ’smi dvandvaḥ sāmāsikasya chaaham evākṣhayaḥ kālo dhātāhaṁ viśhvato-mukhaḥ Audio भावार्थ: : मैं अक्षरों में अकार हूँ और समासों में द्वंद्व नामक समास हूँ। अक्षयकाल अर्थात् काल का भी महाकाल तथा सब ओर मुखवाला, विराट्स्वरूप, सबका धारण-पोषण करने वाला भी मैं ही हूँ॥33॥ Translation […]
Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 32
सर्गाणामादिरन्तश्च मध्यं चैवाहमर्जुन |अध्यात्मविद्या विद्यानां वाद: प्रवदतामहम् || 32|| sargāṇām ādir antaśh cha madhyaṁ chaivāham arjunaadhyātma-vidyā vidyānāṁ vādaḥ pravadatām aham Audio भावार्थ: हे अर्जुन! सृष्टियों का आदि और अंत तथा मध्य भी मैं ही हूँ। मैं विद्याओं में अध्यात्मविद्या अर्थात् ब्रह्मविद्या और परस्पर विवाद करने वालों का तत्व-निर्णय के लिए किया जाने वाला वाद हूँ॥32॥ […]
Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 31
पवन: पवतामस्मि राम: शस्त्रभृतामहम् |झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी || 31|| pavanaḥ pavatām asmi rāmaḥ śhastra-bhṛitām ahamjhaṣhāṇāṁ makaraśh chāsmi srotasām asmi jāhnavī Audio भावार्थ: मैं पवित्र करने वालों में वायु और शस्त्रधारियों में श्रीराम हूँ तथा मछलियों में मगर हूँ और नदियों में श्री भागीरथी गंगाजी हूँ॥31॥ Translation Amongst purifiers I am the wind, and amongst […]
Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 30
प्रह्लादश्चास्मि दैत्यानां काल: कलयतामहम् |मृगाणां च मृगेन्द्रोऽहं वैनतेयश्च पक्षिणाम् || 30|| prahlādaśh chāsmi daityānāṁ kālaḥ kalayatām ahammṛigāṇāṁ cha mṛigendro ’haṁ vainateyaśh cha pakṣhiṇām Audio भावार्थ: मैं दैत्यों में प्रह्लाद और गणना करने वालों का समय (क्षण, घड़ी, दिन, पक्ष, मास आदि में जो समय है वह मैं हूँ) हूँ तथा पशुओं में मृगराज सिंह और […]
