भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथा: |येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम् || 35|| bhayād raṇād uparataṁ mansyante tvāṁ mahā-rathāḥyeṣhāṁ cha tvaṁ bahu-mato bhūtvā yāsyasi lāghavam Audio भावार्थ: और जिनकी दृष्टि में तू पहले बहुत सम्मानित होकर अब लघुता को प्राप्त होगा, वे महारथी लोग तुझे भय के कारण युद्ध से हटा हुआ मानेंगे॥35॥ Translation The […]
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Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 34
अकीर्तिं चापि भूतानिकथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम् |सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते || 34|| akīrtiṁ chāpi bhūtānikathayiṣhyanti te ’vyayāmsambhāvitasya chākīrtirmaraṇād atirichyate Audio भावार्थ: तथा सब लोग तेरी बहुत काल तक रहने वाली अपकीर्ति का भी कथन करेंगे और माननीय पुरुष के लिए अपकीर्ति मरण से भी बढ़कर है॥34॥ Translation People will speak of you as a coward and a deserter. For […]
Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 33
अथ चेतत्वमिमं धर्म्यं संग्रामं न करिष्यसि |तत: स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि || 33|| atha chet tvam imaṁ dharmyaṁ saṅgrāmaṁ na kariṣhyasitataḥ sva-dharmaṁ kīrtiṁ cha hitvā pāpam avāpsyasi Audio भावार्थ: किन्तु यदि तू इस धर्मयुक्त युद्ध को नहीं करेगा तो स्वधर्म और कीर्ति को खोकर पाप को प्राप्त होगा ॥33॥ Translation If, however, you refuse […]
Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 32
यदृच्छया चोपपन्नं स्वर्गद्वारमपावृतम् |सुखिन: क्षत्रिया: पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम् || 32|| yadṛichchhayā chopapannaṁ swarga-dvāram apāvṛitamsukhinaḥ kṣhatriyāḥ pārtha labhante yuddham īdṛiśham Audio भावार्थ: हे पार्थ! अपने-आप प्राप्त हुए और खुले हुए स्वर्ग के द्वार रूप इस प्रकार के युद्ध को भाग्यवान क्षत्रिय लोग ही पाते हैं॥32॥ Translation O Parth, happy are the warriors to whom such opportunities […]
Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 31
स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि |धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते || 31|| swa-dharmam api chāvekṣhya na vikampitum arhasidharmyāddhi yuddhāch chhreyo ’nyat kṣhatriyasya na vidyate Audio भावार्थ: तथा अपने धर्म को देखकर भी तू भय करने योग्य नहीं है अर्थात् तुझे भय नहीं करना चाहिए क्योंकि क्षत्रिय के लिए धर्मयुक्त युद्ध से बढ़कर दूसरा कोई कल्याणकारी कर्तव्य नहीं […]
Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 30
देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत |तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि || 30| dehī nityam avadhyo ’yaṁ dehe sarvasya bhāratatasmāt sarvāṇi bhūtāni na tvaṁ śhochitum arhasi Audio भावार्थ: हे अर्जुन! यह आत्मा सबके शरीर में सदा ही अवध्य (जिसका वध नहीं किया जा सके) है। इस कारण सम्पूर्ण प्राणियों के लिए तू शोक करने योग्य नहीं […]
Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 29
आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेनमाश्चर्यवद्वदति तथैव चान्य: |आश्चर्यवच्चैनमन्य: शृ्णोतिश्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित् || 29|| āśhcharya-vat paśhyati kaśhchid enanāśhcharya-vad vadati tathaiva chānyaḥāśhcharya-vach chainam anyaḥ śhṛiṇotiśhrutvāpyenaṁ veda na chaiva kaśhchit Audio भावार्थ: कोई एक महापुरुष ही इस आत्मा को आश्चर्य की भाँति देखता है और वैसे ही दूसरा कोई महापुरुष ही इसके तत्व का आश्चर्य की भाँति वर्णन करता […]
Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 28
अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत |अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना || 28|| avyaktādīni bhūtāni vyakta-madhyāni bhārataavyakta-nidhanānyeva tatra kā paridevanā Audio भावार्थ: हे अर्जुन! सम्पूर्ण प्राणी जन्म से पहले अप्रकट थे और मरने के बाद भी अप्रकट हो जाने वाले हैं, केवल बीच में ही प्रकट हैं, फिर ऐसी स्थिति में क्या शोक करना है?॥28॥ Translation O scion […]
Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 27
जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च | तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि || 27|| jātasya hi dhruvo mṛityur dhruvaṁ janma mṛitasya chatasmād aparihārye ’rthe na tvaṁ śhochitum arhasi भावार्थ: क्योंकि इस मान्यता के अनुसार जन्मे हुए की मृत्यु निश्चित है और मरे हुए का जन्म निश्चित है। इससे भी इस बिना उपाय वाले विषय में […]
Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 26
अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम् | तथापि त्वं महाबाहो नैवं शोचितुमर्हसि || 26|| atha chainaṁ nitya-jātaṁ nityaṁ vā manyase mṛitamtathāpi tvaṁ mahā-bāho naivaṁ śhochitum arhasi भावार्थ: किन्तु यदि तू इस आत्मा को सदा जन्मने वाला तथा सदा मरने वाला मानता हो, तो भी हे महाबाहो! तू इस प्रकार शोक करने योग्य नहीं है॥26॥ […]
